Ekadashi Vrat एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाते ?

Ekadashi Vrat वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादसी को वरूथिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी मोक्ष, सौभाग्य व पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है। इस दिन व्रत करना और विधि-विधान से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा करना शुभ माना गया है। ऐसे में घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए एकादशी पर इन विशेष नियमों का ध्यान जरूर रखें।

एकादशी के दिन सभी पाप चावल में रहते हैं Ekadashi Vrat

जरूर करें ये काम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु तुलसी के बिना भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए एकादशी पर उनके भोग में तुलसी दल शामिल करना न भूलें। एकादशी पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। ऐसा करने से विष्णु जी की विशेष कृपा की प्राप्ति होती है।

क्या आप जानते हैं मान्यता और पौराणिक कथा ?

एक बार महर्षि मेधा ने क्रोध में आकर अपने शरीर का त्याग कर दिया था और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चूँकि वह दिन एकादशी थी, इसलिए चावल में महर्षि मेधा का अंश माना जाता है। एकादशी को चावल खाने को मांसाहार के समान माना गया है।ऐसा माना जाता है कि एकादशी के दिन सभी पाप चावल में आकर निवास करते हैं। जो व्यक्ति इस दिन चावल खाता है, उसके शरीर में वे पाप प्रवेश कर जाते हैं।चावल में जल की मात्रा बहुत अधिक होती है।


एकादशी पर चंद्रमा का जल तत्व पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इस दिन चावल खाने से शरीर में जल तत्व बढ़ता है, जिससे मन चंचल और विक्षिप्त हो सकता है, जो आध्यात्मिक एकाग्रता में बाधा डालता है। एकादशी उपवास का उद्देश्य शरीर को हल्का और मन को शांत रखना है। चावल तामसिक प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकता है, जो व्रत के उद्देश्यों के विरुद्ध है। इसलिए, भक्त भगवान विष्णु की कृपा पाने और पापों से बचने के लिए एकादशी पर चावल का सेवन नहीं करते हैं।