Election Schedule : कहीं बीवी तो कहीं सास बीमार – ये हैं चुनावी ड्यूटी के बहाने

Election Schedule लोकतंत का पर्व है अपना कर्तव्य निभाइये और मतदान अवश्य कीजिये। ये सिर्फ शाइनिंग उत्तराखंड न्यूज़ की अपील ही नहीं चुनाव आयोग , सरकार और लोकतंत्र की अपील भी है। लेकिन आज बात ऐसे बहानेबाज कार्मिकों की करते हैं जिनका चुनावी पर्व में या तो पति बीमार हो गया बीवी , किसी की सास अस्पताल में हैं तो कोई बच्चे से परेशान है। लिहाज़ा चुनावी ड्यूटी नहीं कर सकते हैं। हांलाकि ऐसे भी लोग हैं जो चुनाव नजदीक आते ही उम्मीदवारी में पूरी मुस्तैदी से डट जाते हैं, अपना दुख दर्द भूल जाते हैं। दूसरी तरफ, चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारी-कर्मी कभी दिल में दर्द तो कभी बीमार पति-पत्नी, सास-ससुर की सेवा का हवाला देकर खुद को ड्यूटी से अलग करने की कोशिश करते हैं। अब तक कार्मिक में 100 से ज्यादा आवेदन चुनाव ड्यूटी से अलग करने के लिए प्राप्त हुए हैं।

 

100 से ज्यादा आवेदन चुनाव ड्यूटी से अलग करने के Election Schedule

नैनीताल संसदीय सीट पर चुनाव को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। जिले में आरक्षित मिलाकर 1,111 बूथ हैं। प्रत्येक बूथ पर 4 सदस्यीय पोलिंग पार्टी होती हैं इस तरह 4,444 अधिकारी-कर्मी बूथ पर ही तैनात होते हैं। इसके अलावा 106 सेक्टर व 35 जोन हैं। एफएसटी, वीटी, एसएसटी, एटी, आरओ, एआरओ समेत कुल 8 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मी चुनाव ड्यूटी में तैनात किए जाते हैं। जिले में चुनाव से दो-तीन माह पूर्व ही सभी सरकारी विभागों से अधिकारी-कर्मचारियों की सूची मांग ली जाती है, फिर इन कर्मचारियों को चुनावी प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व निर्विघ्न ढंग से मनाया जा सके। इधर चुनाव से ड्यूटी हटाने के लिए अभी से कर्मचारियों के प्रयास शुरू हो गए हैं।

उत्तराखंड में सामने आ रहे बहानेबाज

अशोक कुमार पांडेय, सीडीओ/नोडल अधिकारी कार्मिक का मीडिया से कहना है कि पिछले एक सप्ताह में कार्मिक विभाग में 100 से अधिक आवेदन ड्यूटी हटाने के प्राप्त हुए हैं। इनमें ज्यादतर ने स्वयं को बीमार, तो किसी ने पति या पत्नी तो किसी ने सास ससुर और किसी ने छोटे बच्चों का हवाला देते हुए ड्यूटी से मुक्ति की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार, सभी आवेदनों की जांच की जाती है। यदि किसी ने बीमारी का हवाला दिया है तो मेडिकल बोर्ड से जांच करवाई जाती है फिर ड्यूटी हटाई जाती है। अब ऐसे में आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि लोकतंत्र के इस महायज्ञ में आहुति देने के लिए मतदाताओं को तो चुनाव आयोग जागरूक बना रहा है लेकिन ड्यूटी से बचने के लिए इन बहाने बाज़ों को कौन जागरूक करेगा।

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