EU Universal Charger आप अगर अपने मोबाइल के लिए चार्जर ढूंढ रहे हैं और लेपटॉप भी डिस्चार्ज पड़ा है तो क्या करेंगे अलग अलग पावर पॉइंट्स पर चार्जिंग के लिए अलग अलग चार्जर इस्तेमाल करेंगे। अब अगर कोई एक चार्जर खराब हो जाये या खो जाये तो क्या होगा ? आप नया खरीदेंगे और इस तरह से दो नुक्सान होगा , पहला आपकी जेब ढीली होगी दुसरा ई कचरा बढ़ेगा। लिहाज़ा दुनिया की खोज अब परवान चढ़ रही है और सारे गैजेट्स के लिए एक चार्जर आ रहा है। जी हाँ एक देश एक चार्जर शानदार आगाज़ है जिसका दुनियाभर को इंतज़ार है।
EU Universal Charger बचेगा करोड़ों रुपया और ई कचरा भी खत्म होगा

- EU Universal Charger अब आपको अपने फोन के लिए अलग-अलग चार्जर नहीं लेने पड़ेंगे। यूरोपीय यूनियन ने एक बड़ा बदलाव किया है। यहाँ कहा गया है कि अब किसी भी तरह के स्मार्टफोन, टेबलेट, डिजिटल कैमरा, हेडफोन जैसे गैजेट्स के लिए एक ही तरह का चार्जर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए USB टाइप-C को सभी गैजेट्स के लिए कंपल्सरी किया गया है। जिसे 2024 तक सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर लागू करने पर विचार किया जा रहा है। अब इस फैसले के बाद एप्पल जैसी नामचीन कंपनी को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इससे हर साल करीब 250 मिलियन यूरो (2,075 करोड़ रुपए) की बचत होगी।

- EU Universal Charger जल्द ही यूरोप में सभी तरह के स्मार्टफोन व टेबलेट के लिए एक जैसा चार्जर मिलेगा। मोबाइल कंपनियों की कई किस्म के चार्जर बनाने की नीति बंद करने के कानून के ड्राफ्ट पर मंगलवार को यूरोपीय संघ के सदस्यों और संसद ने सहमति दे दी। माना जा रहा है कि कानून बना तो साल 2024 के आखिर तक सभी डिवाइस यूएसबी सी-टाइप चार्जर से चार्ज होंगे।

EU Universal Charger 11 हजार टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होगा
- EU Universal Charger यूरोपीय संघ का मानना है कि उसके करीब 45 करोड़ नागरिकों को एक जैसे चार्जर मिलेंगे तो करीब 11 हजार टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होगा। लोगों का पैसा भी बचेगा, क्योंकि वे हर साल करीब 21,740 करोड़ रुपये चार्जर खरीदने में खर्च कर रहे हैं। इस समय एपल का लाइटनिंग, माइक्रो यूएसबी व यूएसबी सी-टाइप चार्जर उपयोग हो रहे हैं। इनमें यूएसबी सी-टाइप को सबके लिए सुलभ और तेज मानते हुए अपनाया जा सकता है। इसे एपल कंपनी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वह अपने डिवाइस के चार्जर बाकियों से न केवल अलग रखता है, बल्कि कीमत भी ऊंची होती है। उसने यूरोप के इस कदम के विरोध में कहा कि इससे इनोवेशन की रफ्तार धीमी होगी। और ई-वेस्ट घटने के बजाय बढ़ेगा।
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