Friendship With Similar Smells : कुत्ते ही नहीं इंसान भी सूंघकर दोस्ती करते हैं – 1 Science World

Special Story By : Anita Tiwari , Uttarakhand 

Friendship With Similar Smells जिस तरह कुत्ते सूंघकर ही अपने दोस्त या दुश्मन को पहचान लेते हैं, उसी तरह इंसान भी लोगों की गंध सूंघकर उन्हें अपना दोस्त बनाते हैं। यह दावा इजराइल के वीजमन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने किया है। रिसर्चर्स का कहना है कि हमें जिन लोगों की गंध अपनी गंध जैसी लगती है, हमारी उनसे दोस्ती दूसरों के मुकाबले बेहतर होती है।

Friendship With Similar Smells कुत्ते ही नहीं इंसान भी सूंघकर दोस्ती करते हैं 

Friendship With Similar Smells
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  • वैज्ञानिकों ने दो अंजानों के बीच के सोशल इंटरैक्शन की क्वालिटी को समझने के लिए इलेक्ट्रॉनिक नोज या eNose को विकसित की। इसकी मदद से पहले दोनों को सूंघा गया और गंध की पहचान की गई। रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि जानवरों के साथ-साथ इंसानों के लिए भी गंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। Friendship With Similar Smells 
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  • Friendship With Similar Smells एक कुत्ते को जब यह समझ नहीं आता कि दूसरे कुत्ते से दोस्ती करनी चाहिए या नहीं, तब वह उसे ठीक से सूंघता है। इसके बाद ही वह यह फैसला लेता है कि दूसरे कुत्ते से दोस्ती करनी है या उससे लड़ना है। सूंघने की यह प्रक्रिया इंसानों के अलावा सभी स्तनधारियों में रिकॉर्ड की गई है। रिसर्च में शामिल इनबाल रावरेबी का कहना है कि इंसान लगातार अपने आसपास लोगों को सूंघते रहते हैं, इस बात से वे खुद अंजान होते हैं। इसके साथ ही वे खुद की गंध भी सूंघते रहते हैं। शायद यही वजह है कि उन्हें जब सामने वाले की गंध अपनी तरह लगती है, तब उससे दोस्ती बेहतर होती है। अब तक हमें यही पता था कि लोग किसी के रूप, बैकग्राउंड, मूल्यों और होशियारी देखकर उससे दोस्ती करते हैं।
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Friendship With Similar Smells ऐसे हुई रिसर्च

  • Friendship With Similar Smells रावरेबी ने अपने इस हाइपोथेसिस को प्रूफ करने के लिए एक ही सेक्स के कुछ दोस्तों को इकट्ठा किया। ये अपनी फ्रेंडशिप की शुरुआत में बहुत जल्दी दोस्त बन गए थे। इसके बाद इनके शरीर की गंध के सैंपल्स लिए गए। जांच में पता चला कि दोनों ही दोस्तों की गंध एक दूसरे से काफी मिलती-जुलती थीं। एक और एक्सपेरिमेंट में रावरेबी ने एक दूसरे से अंजान लोगों की गंध के सैंपल्स को eNose की मदद से इकट्ठा किया। इसके बाद प्रतिभागियों को दोस्ती करने का मौका दिया गया। जांच में पता चला कि जिन लोगों की बहुत्ब आसानी से दोस्ती हो गई उनकी गंध भी एक दूसरे की तरह ही थी। रिसर्चर्स का कहना है कि यह रिसर्च बताती है कि सामाजिक फैसले लेने में हमारी नाक एक अहम भूमिका निभाती है। सोशल केमिस्ट्री बनाने में भी केमिस्ट्री होती है।

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