Special Report By : Anita Tiwari , Uttarakhand

Khatima Assembly 2027 तो क्या उत्तराखंड की राजनीति में 2027 एक अजब संयोग लेकर आने वाला है ? क्या पहाड़ की राजनीति में पहली बार ऐसा होगा कि किसी मुख्यमंत्री की पत्नी और जीत में अहम भूमिका निभाने वाली, सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाली मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की रणनीतिकार गीता पुष्कर धामी खटीमा को अपनी राजनीतिक जमीन बना लेंगी ?
Khatima Assembly 2027 खटीमा के बेहद लोकप्रिय और सक्रिय रहती हैं गीता धामी

- Khatima Assembly 2027 यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि खटीमा विधानसभा क्षेत्र मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पुराना कार्यक्षेत्र और विधानसभा रही है। बीते सालों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधायक रहते हुए तमाम छोटे-बड़े कार्यक्रमों में अपनी पत्नी गीता पुष्कर धामी को साथ रखा। यही नहीं अक्सर ऐसा देखा जाता रहा है कि गीता पुष्कर धामी खटीमा में महिलाओं , युवाओं , बुजुर्गों और सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती रहती है। ऐसे में उनकी लोकप्रियता खटीमा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से ज्यादा नहीं तो कम भी नहीं है।

- Khatima Assembly 2027 एक और वजह समझ में आती है और वह है खटीमा के लोगों का सीएम धामी को नकारने का पश्चाताप। 2022 विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जब मुख्यमंत्री ने चंपावत को अपनी विधानसभा बनाने का निर्णय लिया तो खटीमा से ऐसे बयान आने लगे , ऐसी तस्वीरें आने लगी जिसमें खटीमा के मतदाताओं ने मुख्यमंत्री को वोट ना देने का अफसोस जाहिर किया था। मतदाताओं ने सीएम धामी से माफी भी मांगी और जब मुख्यमंत्री धामी ने इन लोगों से मुलाकात की तो लोगों ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए उसे सुधारने की बात भी कही है।

- Khatima Assembly 2027 ऐसे में जो भावनात्मक लगाव धामी परिवार का खटीमा के लोगों के साथ बढ़ा है , वह कहीं ना कहीं 2027 में जीत की शक्ल में तब्दील हो सकता है। क्योंकि अभी यहां से कांग्रेस के भुवन कापड़ी जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं , लिहाजा 22 से 27 तक के सफर में मुख्यमंत्री धामी भी चाहेंगे कि वह लोगों के मूड को समझते हुए इसे अपनी पार्टी के लिए जीत का आधार तैयार करें। अब क्योंकि यहां पर धानी परिवार को लेकर लोगों में एक ख़ास लगाव और भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता नजर आ रहा है तो ऐसे में पार्टी आलाकमान भी चाहेगी की परिवारवाद को किनारे रखते हुए मुख्यमंत्री की पत्नी गीता पुष्कर धाम की बढ़ती लोकप्रियता को भुनाया जाय। ऐसे में संभव है कि आपको 2027 के विधानसभा चुनाव में पुष्कर सिंह धामी के साथ-साथ गीता पुष्कर धामी भी विधानसभा में नजर आ जाए अगर संभावनाओं के इस खेल को समझा जाए तो ऐसा पहली बार होगा जब किसी मुख्यमंत्री की पत्नी सक्रियता के साथ राजनीति में एंट्री लेंगी ?

- Khatima Assembly 2027 इसके पहले कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की पत्नी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा चुकी है लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वहीं पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिवार की बात करें तो भाजपा के भुवन चंद्र खंडूरी की बेटी कोटद्वार से विधायक बन गई तो उनके बेटे मनीष खंडूरी पौड़ी लोकसभा सीट से चुनाव हार गए। पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की बात करें तो उनकी बेटियां फिलहाल राजनीति से दूर है तो वही पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरव बहुगुणा मौजूदा धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री है। हरीश रावत की बात करें तो उनके बेटे राजनीति में आने के लिए खुद को भी तैयार कर रहे हैं और बेटी अनुपमा विधायक हैं। ऐसे में अनुभव लोकप्रियता जन आकांक्षा की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता पुष्कर धामी की सक्रियता खटीमा विधानसभा क्षेत्र में काफी हद तक उनके पक्ष को मजबूत बना रही है।

- Khatima Assembly 2027 देखना यह होगा कि क्या 2027 तक मुख्यमंत्री की पत्नी की लोकप्रियता का ग्राफ ऊंचा जाएगा या उनका फोकस खटीमा से हटकर चंपावत में शिफ्ट हो जाएगा। हालांकि ऐसा लगता नहीं है क्योंकि खटीमा विधानसभा के लोगों का अपने पूर्व विधायक और मौजूदा मुख्यमंत्री धामी के साथ एक इमोशनल रिलेशन बढ़ता नजर आ रहा है। जिसे कहीं ना कहीं गीता पुष्कर धामी भी करीब से महसूस कर रही है। तो इंतजार कीजिए 2027 का जब संभावनाओं के इस राजनीतिक खेल में आपको पहली बार पति पत्नी दोनों विधानसभा चुनाव लड़ते भी नजर आ सकते हैं।
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