Haldwani Gafoor Basti : उत्तराखंड में शाहीन बाग़ ! सर्दी में मुद्दा गर्म 1 Crime World

देहरादून से अनीता आशीष तिवारी की रिपोर्ट –
 
Haldwani Gafoor Basti :देश दुनिया में एक समय शाहीन बाग़ का मुद्दा खूब सुर्ख़ियों में रहा है। लेकिन पहाड़ की शांत वादियों में भी ये पाँव पसारेगा किसे उम्मीद थी।  लेकिन आज हल्द्वानी की गफूर बस्ती (Gafoor Basti) का मुद्दा नासूर बनता दिखाई दे रहा है। दिल्ली की चर्चित  शाहीन बाग की गर्मी पहाड़ की सर्दी का तापमान बढ़ा रहा है। खबर आ राइ है कि यहाँ भी औरतों और  बच्चों को प्रदर्शन का सबसे पहला हथ्यार बनाया गया है। सड़क गली और चौराहे पर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन हो रहा है और सड़कों पर उतर कर लोग सरकार से उन्हें बेघर न करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन ने 10 जनवरी तक के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रोक दी है।
Haldwani Gafoor Basti  
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  • Haldwani Gafoor Basti   प्रशासन का कहना है कि रेलवे की जमीन पर लगभग 4500 परिवारों ने अतिक्रमण कर रखा है। अब जब गफूर बस्ती से यह अतिक्रमण हटाया जा रहा है तो ये लोग बेघर होने की दुहाई दे रहे हैं। सड़कों पर उतर कर धरना दे रहे हैं, दुआएं कर रहे हैं।’ यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर भी जोरशोर से चलाया जा रहा है। इसकी वजह से तनाव का माहौल बन रहा है। इनमें ज्यादातर वीडियो में लड़कियों को पढ़ाई से वंचित किए जाने और महिलाओं को बेघर होने की दुहाई देते सुना जा सकता है। हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने पिछले दिन कुछ जगह अतिक्रमण हटाया था। लेकिन अब भारी विरोध को देखते हुए अभियान को रोक दिया। अब 10 जनवरी से भारी पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाया जाएगा।

    Haldwani Gafoor Basti   हाईकोर्ट ने दिया था अतिक्रमण हटाने का आदेश

    Haldwani Gafoor Basti  
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Haldwani Gafoor Basti 27 दिसम्बर 2022 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के वनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित गफूर बस्ती में रेलवे की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के आदेश जारी किए थे। एक सप्ताह के भीतर यह अतिक्रमण हटाने की समयावधि भी निर्धारित की थी। साथ ही वनभूलपुरा के लोगों को लाइसेंसी हथियार भी जमा कराने को कहा गया है। दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट भी रेलवे की जमीनों पर अतिक्रमण को ले कर चिंता जताते हुए इसे जल्द से जल्द खाली करवाने के आदेश दे चुका है।

Haldwani Gafoor Basti   पुराना है कब्जे का सिलसिला

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Haldwani Gafoor Basti   दावा किया जा रहा है कि क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे की शुरुआत साल 1975 से हुई थी। इस जमीन पर कब्‍जा करने के लिए पहले यहां कच्ची झुग्गियां बनाई गईं थी जिन्हें बाद में पक्के मकान में तब्दील कर दिया गया। इसी तरह से धीरे-धीरे इबादतगाहों और अस्पतालों के रूप में अवैध कब्जे किए गए। लेकिन जब ये कब्जे हो रहे थे तब रेलवे प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। जब जम कर कब्जे हो गये तो वर्ष 2016 में नैनीताल हाईकोर्ट से सख्ती के बाद रेलवे सुरक्षा बल ने अवैध कब्जेदारों के खिलाफ केस दर्ज कराया लेकिन तब तक हजारों लोग अवैध तौर पर वहां बस चुके थे।

पहले भी हटाए गए थे कब्‍जे

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  • Haldwani Gafoor Basti वर्ष 2016 में नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के चलते यहां कब्जा कर जमे लोगों ने मुकदमा लड़ा लेकिन वे कोर्ट में कब्जे को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं दे पाए। डेढ़ दशक पहले भी अवैध कब्जेदारों के खिलाफ अभियान चलाया गया था। उस समय भारी फ़ोर्स तैनात कर कुछ हिस्से से अतिक्रमण हटवाया गया था। बताया जा रहा है कि इस दौरान कुछ कब्जेदारों के घरों के नीचे रेलवे लाइनें भी निकली थीं। हालांकि भारी विरोध के चलते तब यह अभियान शांत हो गया था। और जो जगह खाली करवायी गई थी वहां फिर से कब्जे हो गये।कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश भी हुए मुखर

Haldwani Gafoor Basti गफूर बस्ती में अवैध कब्जे हटाने के विरोध में जहां समुदाय विशेष के लोग सड़कों पर उतर आए हैं वहीं विपक्ष कांग्रेस भी इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पहले जहां दिवंगत कांग्रेस नेत्री इंदिरा हृदयेश ने इन कब्जेदारों का साथ दिया था वहीं अब उनकी विरासत संभाल रहे उनके बेटे सुमित हृदयेश भी इस मामले में कब्जेदारों के साथ खड़े हैं। क्षेत्र में अवैध कब्जों को हटाने के मामले में रेलवे की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि अवैध कब्ज़े से न सिर्फ विकास में दिक्कत आ रही बल्कि विस्तार भी प्रभावित हो रहा है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले अतिक्रमण करने वालों को कई नोटिस भेजे गए थे लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया और न ही किसी ने खुद से अतिक्रमण हटाया।

फ्रंट पर आये कांग्रेस लीडर क़ाज़ी निज़ामुद्दीन
 
  •  Haldwani Gafoor Basti  पूर्व विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि पहले यह जमीन 29 एकड़ बताई गई थी लेकिन बाद में 79 एकड़ बता दी गई। गफूर बस्ती में साठ साल से भी अधिक समय से मंदिर, ओवरहेड टैंक, शिशु मंदिर और सीवर लाइन हैं। यदि यह रेलवे की जमीन है तो यहां ओवरहेड टैंक और सीवर लाइन कैसे बना दी गई? यहां जमीन का बैनामा किया गया तो सरकार ने रेवेन्‍यू कैसे ले लिया? क्या तब यह रेलवे की जमीन नहीं थी? यहां वक्फ बोर्ड की संपत्ति भी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इन लोगों के पुनर्वास के लिए कदम उठाने होंगे। इनके प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उनको बेघर न किया जाए। कब्जे हटाने के विरोध में हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक व अन्य दस लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जिस पर पांच जनवरी को सुनवाई होनी है। 

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