Har Ghar Tiranga Uttarakhand देश में जश्न ए आज़ादी का पर्व है। दिल्ली , देहरादून यूपी , बिहार , गोवा राजस्थान सब तिरंगे के रंग में रंगे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरा देश हर घर तिरंगा फहरा रहा है। क्या हिन्दू क्या मुस्लिम और क्या अगड़ा क्या पिछड़ा सब देशभक्ति का महोत्सव मना रहे हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी हांथों में तिरंगा लेकर सड़कों पर जुलुस , रैली और मीटिंग कर लोगो को झंडा हर घर लगाने की अपील कर रहे हैं।

- लेकिन क्या आप जानते हैं इस तिरंगे के लिए 5 , 10 , 20 नहीं 40 रूपये कीमत रखी गयी है जो प्रदेश की लाखों झुग्गी झोपडी और मलिन बस्तियों सहित आम गरीब भारतीय की इज़हार ए देशभक्ति पर बहुत बड़ा रोड़ा बन रहा है।
Har Ghar Tiranga Uttarakhand उधम सिंह नगर के सभी 2 लाख 80 घरों पर ध्वजारोहण का लक्ष्य – जिलाधिकारी

- Har Ghar Tiranga Uttarakhand उत्तराखंड सरकार में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अन्तर्गत हर घर तिरंगा अभियान के सफल आयोजन हेतु चल रही तैयारियों की रुद्रपुर में समीक्षा की । कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव और अधिक उत्साह व उमंग के साथ मनाये जाने हेतु नागरिकों को अपने-अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराये जाने के लिए प्रोत्सातिह करने के लिए हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिक द्वारा कपास, पॉलिस्टर, ऊन, रेशम, खादी बंटिंग से बने हुए राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को 13 अगस्त से 15 अगस्त तक खुले स्थानों पर, अपने घरों पर दिन-रात फहराया जा सकता है। कृषि मंत्री ने कहा कि झण्डे को सम्मान से लगाने व उतारने के साथ ही सम्मान से झण्डे का फ्लैग कोड के अनुसार निस्तारण किया जाये।

Har Ghar Tiranga Uttarakhand रुद्रपुर में कृषि मंत्री को डीएम ने दी कीमत की जानकारी
- Har Ghar Tiranga Uttarakhand इसी बैठक में उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी युगल किशोर पन्त ने बताया कि जनपद में सभी 2 लाख 80 घरों पर ध्वजारोहण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि जनपद में अब तक 01 लाख 50 हजार झण्डों की व्यवस्था की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जनपद में 17345 परिवारों को निःशुल्क झण्डे सहित डण्डे की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही डीएम ने बताया कि जनपद में डण्डे सहित झण्डे की कीमत 40 रूपये निर्धारित की गई है।

- Har Ghar Tiranga Uttarakhand देश का आम मिडिल क्लास नागरिक पहले से ही मंहगाई और आर्थिक मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। ऐसे में तिरंगे की कीमत उसको जेब पर भारी बोझ जैसा लग रहा है। क्योंकि दिल में तो ज़ज़्बा है कि वो सबसे ऊँचा तिरंगा फहराए लेकिन जेब कहती है कि उसके लिए 40 रूपये कहीं ज्यादा है। ऐसे में बेहतर होता कि झंडों को आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए मुफ्त वितरण किया जाए और कीमत भी 10 से 20 रूपये ही निर्धारित होती जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग बड़ी आसानी से देश के इस महापर्व में भागीदारी कर आज़ादी के अमृत महोत्सव के भागीदार बन सकते।
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