Hindu Scriptures मरे आदमी की बुराई करना क्यों पाप है ?

Hindu Scriptures आपने अक्सर ये देखा होगा कि लोग एक दूसरे की अक्सर बुराई करते मिल जाते हैं। कभी उसकी आदतों को लेकर तो कभी निजी संबंधों से जुडी बुराइयां होती हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि मरने के बाद क्यों किसी की बुराई या मजाक करना आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसे लेकर हमारे तमाम धर्मों और हिंदू पौराणिक शास्त्रों और ग्रंथों में क्या बात कही गई है। आइए जानते हैं इसके बारे में स्पष्ट तरीके से।

मृत व्यक्ति की बुराई क्यों नहीं करनी चाहिए Hindu Scriptures


शास्त्र कहते हैं कि, किसी की भी मृत्यु होने के बाद उसकी निंदा करने से बचना चाहिए. भले ही उन्होंने अपने जीवनकाल में हमें दुख या कष्ट क्यों न दिया हो. जब उनकी उपस्थिति हमारे बीच न हो, तो भी हमें उनका अपमान करने से बचना चाहिए. कोशिश करें कि, उनके बारे में बात न कि जाए या फिर उनसे जुड़ी अच्छी यादों को ही याद करना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि भले ही वो आज शारीरिक तौर पर हमारे साथ नहीं हैं, हमारा उनके साथ हमारा कार्मिक लिंक हमेशा एक्टिवेटेड रहता है. अगर हम उनकी निंदा या उन पर हंसते हैं, तो हमारा भावनात्मक संबंध उनसे जुड़ा रहता है.

मनुस्मृति में किसी निंदा करना घोर अपराध

मनुस्मृति के अनुसार, किसी की भी निंदा करना घोर अपराध है, खासकर किसी मृत व्यक्ति का मजाक उड़ाने से नर्क में भी जगह नहीं मिलती है. प्राचीन शास्त्रों में भी इसका स्पष्ट उदाहरण देखने को मिलता है… महाभारत के शांति पर्व में भी युधिष्ठिर को भीष्म पितामह से यही सीख मिली कि मृत व्यक्ति का अपमान भूलकर भी नहीं करना चाहिए…. ऐसा करने से हमारी ऊर्जा नकारात्मक होती है. हमारी हीलिंग करने की शक्ति बाधा होती है. उन्होंने जीते जी बेशक गलत आदतों को नहीं छोड़ा लेकिन उनकी बुराइयां करके हम उनसे अच्छे कैसे हो सकते हैं? इसलिए किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसपर हंसना या मजाक बनाने से बचना चाहिए.

मरे हुए इंसान की निंदा करने से क्या होता है
जानिए शास्त्रों में इसे लेकर क्या कहा गया है

जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो वह अपना पक्ष रखने की स्थिति में नहीं होता है. ऐसे में उसकी बुराई करने से आपको मजा तो आ सकता है, लेकिन ये कायरता का काम है.किसी के मरने के बाद आप उसके बारे में क्या बोलते हैं, इससे उस मृत व्यक्ति का नहीं बल्कि आपकी मानसिकता का असर दिखता है.
वह इंसान भले ही इस दुनिया को छोड़कर चला गया हो, लेकिन उसके अपने लोग अभी भी जीवित हैं. आपके द्वारा कही गई अपमानजनक बातें उन्हें पीड़ा पहुंचा सकती है. प्रत्येक इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों होती है. मरने के बाद मात्र बुराई को गिनना अधूरा सच है. इतिहास और समय तय करते हैं कि कोई भी व्यक्ति कैसा था, न कि भावनाओं में कही गई बातें. प्रत्येक धर्म इस बात पर विश्वास करता है कि, मृत व्यक्ति की बुराई भूलकर भी नहीं करनी चाहिए. मरने के बाद इंसान सांसारिक मोह माया से ऊपर चला जाता है.