आशीष तिवारी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट –

उत्तराखंड में अफसरों के तबादले की लिस्ट तैयार
आईएएस पीसीएस का बम्पर तबादला करेगी सरकार
IAS PCS Transfer विधान सभा चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तराखंड में अफसरशाही में विधान सभा सत्र से पहले कभी भी बड़े फेरबदल की प्रबल संभावना है। उत्तराखंड की सियासत और नौकरशाही के गलियारों में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है: अगली तबादला सूची में किसका नाम होगा ? आगामी विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार प्रशासनिक मशीनरी को नए सिरे से कसने की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों की मानें तो इस बार शासन का पूरा फोकस फील्ड स्तर पर तैनात अफसरों पर है।
उत्तराखंड में बदलने वाली है प्रशासनिक कुर्सियां
3-4 जिलों के DM और बदल सकते हैं सीडीओ

▪️3-4 जिलों के DM , प्राधिकरण में बदलाव की चर्चा IAS PCS Transfer
चर्चा है कि राज्य के करीब तीन से चार जिलों में जिलाधिकारियों की कुर्सी बदल सकती है। सिर्फ DM ही नहीं, अपर जिलाधिकारी (ADM) और उपजिलाधिकारी (SDM) स्तर पर भी बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। कुछ जिलों में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की जिम्मेदारी भी नए चेहरों को सौंपी जा सकती है।
▪️IAS-PCS को मिल सकती हैं नई जिम्मेदारियां
देहरादून , हरिद्वार , अल्मोड़ा और नैनीताल जैसे बड़े जिलों में बड़े फेरबदल संभावित हैं वहीँ कई IAS और PCS अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। इनमें वे अफसर शामिल हो सकते हैं जो लंबे समय से एक ही पद या तैनाती पर जमे हैं। साथ ही चुनावी नजरिए से जिलों की व्यवस्था मजबूत करने के लिए नए चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है।
▪️तीन साल का फॉर्मूला बनेगा आधार?
तबादलों में दो बातों पर खास नजर रहने की संभावना है। पहला, एक ही स्थान पर तीन साल से ज्यादा समय बिता चुके अफसरों की तैनाती बदलना। दूसरा, जिलों में बेहतर प्रशासनिक तालमेल के लिए जिम्मेदारियों में फेरबदल। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत चुनाव से जुड़े अफसरों के कार्यकाल और तैनाती की समीक्षा होती है। हालांकि तीन साल का नियम सभी पर एक समान लागू नहीं होता, बल्कि पद, चुनावी जिम्मेदारी और आयोग के निर्देशों के आधार पर पात्रता तय होती है।

▪️शासन स्तर के अफसर भी रडार पर
फील्ड के साथ-साथ शासन स्तर पर तैनात कुछ अफसरों के विभाग बदलने की भी चर्चा है। माना जा रहा है कि कुछ बड़े विभागों की जिम्मेदारियों में फेरबदल पर मंथन चल रहा है, लेकिन यह कवायद व्यापक बदलाव के बजाय चुनिंदा विभागों तक सीमित रह सकती है। मकसद है विभागों के बीच बेहतर समन्वय, कामकाज के बंटवारे में सुधार और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना।
▪️आखिर क्यों अहम है यह फेरबदल ?
विधानसभा चुनाव से पहले फील्ड स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त करना सरकार की जरूरत मानी जा रही है। जिलों में तैनात अधिकारी चुनावी तैयारियों, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि शासन स्तर पर तैनाती और जिम्मेदारियों की समीक्षा की जा रही है।अब सबकी निगाहें संभावित तबादला सूची पर टिकी हैं। अगर यह कवायद अंतिम निर्णय तक पहुंचती है, तो इसका सबसे बड़ा असर जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था पर दिख सकता है। अनुमान है कि जल्द ही तबादले होंगे।

