Special Story By : Anita Tiwari , Dehradun
Jhanda Mela Dehradun 2022 डेरा से देहरादून बनने की रोचक कहानी है झंडा जी का मेला , जिसकी कहानी आज हम आपको बता रहे हैं। विश्वप्रसिद्ध झंडा साहिब मेला की और उसके अद्भुत इतिहास के पीछे छिपी है देहरादून के जन्म की कहानी …
Jhanda Mela Dehradun 2022 झंडा मेला या झंडे का मेला History –

- Jhanda Mela Dehradun 2022 गुरु राम राय जी सिखों के सम्मानित सातवें गुरु के सबसे बड़े पुत्र थे – श्री हर राय जी….. जब राम राय जी ने औरंगजेब की अदालत में चमत्कार किए, हर राय जी ने उन्हें 1699 में पंजाब से निकाल दिया। राम राय जी ने आज के उत्तराखंड में डून घाटी की यात्रा की और अपना निपटान स्थापित किया जिसे ‘डेरा’ कहा जाता है।

- इस प्रकार शहर को इसका नाम ‘देहरादून’ के रूप में मिला। गुरु राम राय जी ने शहर में एक गुरुद्वारा बनाया जिसे दरबार साहिब के नाम से जाना जाता है। गुरुजी को सम्मान देने के लिए झंडा मेला हर साल आयोजित किया जाता है।
Jhanda Mela Dehradun 2022 झंडा मेले की मान्यता –
- यह मान्यता हैं की जिन महिलाओ को यह झंडा सिलने का मौका मिलता हैं उनके जीवन के सरे कष्ट दूर हो जाते हैं | Jhanda Mela Dehradun 2022 हर साल महिलाओं को इंतजार रहता है कि कब उन्हें बुलावा आये और वे सेवा में जुट जाए | यहाँ के लोगो का कहना हैं कि गुरु राम राय की मृत्यु काफी रहस्यमयी ढंग से हुई थी | ऐसा कई बार होता था कि गुरु राम राय ध्यान में होते हुए अपने शरीर को छोड़ अपने भक्तों की मदद करने चले जाते थे | लेकिन एक दफा जब वह दो दिन तक अपने कमरे से बाहर नहीं आये तो उनकी पहली पत्नी माता पंजाब कौर ने सहायकों से दरवाजा तुड़वाया और देखा कि गुरु राम राय की म्रत्यु हो चुकी थी। आज भी उनका बिस्तर दरबार साहिब के गृहघर में रखा हुआ है।

Jhanda Mela Dehradun 2022 झंडा मेला या झंडे का मेला History –
- उत्तरी भारत में सबसे बड़ा मेल है जो हजारों भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करता है , यह मेला देहरादून में मनाया जाता हैं| इसे श्री गुरु राम राय जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जो सिखों के सातवें गुरु के सबसे बड़े पुत्र हैं – श्री हर राय जी। Jhanda Mela Dehradun 2022 इस मेले में 1733 में इस दिन डून घाटी में आने के लिए एक विशाल ध्वज (झांडा जी) फहराया गया है। झंडा मेला चैत्र के पांचवें दिन मनाया जाता है जो होली के पांचवें दिन भी है।

- देहरादून के जन्म और विकास की गाथा यहीं से आरंभ होती है। Jhanda Mela Dehradun 2022 नानक पंथ के सातवें गुरु हरराय महाराज के ज्येष्ठ पुत्र रामराय ने इसी स्थान पर झंडा चढ़ाया था। इसमें समाहित है एक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक परंपरा, जो दून में पनपी और पंजाब, हरियाणा, यूपी, हिमाचल व दिल्ली तक फैल गई। वर्ष 1675 में चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन गुरु रामराय महाराज के कदम दून की धरती पर पड़े। उनकी प्रतिष्ठा में एक बड़ा उत्सव मनाया गया। यही से झंडा मेला की शुरुआत हुई, जो कालांतर में दूनघाटी का वार्षिक समारोह बन गया।

- Jhanda Mela Dehradun 2022 देहरादून में इस साझा चूल्हे की नींव दरबार साहिब श्री गुरु रामराय के आंगन में वर्ष 1675 में चैत्र पंचमी के दिन पड़ी। यही देहरादून में ऐतिहासिक झंडा मेला की शुरुआत हुई।
- उस समय देहरादून एक छोटा गांव हुआ करता था। मेले में पहुंचने वाले लोगों के लिए भोजन का इंतजाम करना आसान नहीं था। इसी को देखते हुए श्री गुरु रामराय महाराज ने ऐसी व्यवस्था बनाई कि दरबार की चौखट में कदम रखने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा न लौटे। Jhanda Mela Dehradun 2022 चूल्हे की आंच ठंडी नहीं पड़ी इसके बाद बीते 337 साल से दरबार साहिब में चूल्हे की आंच ठंडी नहीं पड़ी। इस चूल्हे ने अपनी चौखट पर आए किसी भी व्यक्ति से कभी यह सवाल नहीं किया कि उसका मजहब क्या है। यह भेद करना नहीं, भेद मिटाना जानता है, इसीलिए इंसानियत का ‘सांझा चूल्हा’ बन गया।

337 साल से इंसानियत का ‘सांझा चूल्हा’ जला रहा है Jhanda Mela Dehradun 2022 पवित्र झंडा साहिब का दरबार

ये हैं परम्परा निभा रहे महंत के नाम –
महंत औददास (1687-1741)
महंत हरप्रसाद (1741-1766)
महंत हरसेवक (1766-1818)
महंत स्वरूपदास (1818-1842)
महंत प्रीतमदास (1842-1854)
महंत नारायणदास (1854-1885)
महंत प्रयागदास (1885-1896)
महंत लक्ष्मण दास (1896-1945)
महंत इंदिरेश चरण दास (1945-2000)
महंत देवेंद्र दास (25 जून 2000 से गद्दीनसीन)
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