Madhyamaheshwar Mandir अगर आप भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत, आध्यात्मिक और प्राकृतिक जगह की तलाश में हैं, तो उत्तराखंड की वादियों में स्थित मध्यमहेश्वर मंदिर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. जैसे ही केदारनाथ धाम के कपाट खुलते हैं, वैसे ही श्रद्धालु पंच केदार की यात्रा की योजना बनाने लगते हैं. इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है मध्यमहेश्वर मंदिर, जहां पहुंचना खुद एक रोमांचक अनुभव होता है. हरे-भरे जंगल, ऊंचे पहाड़ और शुद्ध हवा इस यात्रा को और भी खास बना देते हैं. यह जगह न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है …
प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं Madhyamaheshwar Mandir

मध्यमहेश्वर मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिला में स्थित है और यह पंच केदार मंदिरों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है. यह मंदिर समुद्र तल से करीब 11,000 फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है, जहां तक पहुंचने के लिए ट्रेकिंग करनी पड़ती है. ऋषिकेश से इसकी दूरी लगभग 225 किलोमीटर और हरिद्वार से करीब 200 किलोमीटर है. ऊंचाई और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह जगह आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ एडवेंचर का भी शानदार अनुभव देता है.
मध्यमहेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास

मध्यमहेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों द्वारा किया गया था। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव के दर्शन के लिए तीर्थ यात्रा पर गए, लेकिन युद्ध में हुए विनाश से शिवजी नाराज थे और उनसे मिलने से इनकार कर दिया। भगवान शिव ने पांडवों की भक्ति से प्रसन्न होकर एक बेल के रूप में प्रकट होकर धरती में विलीन हो गए, फिर पाँच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें आज ‘पंच केदार’ के रूप में पूजा जाता है। मध्यमहेश्वर मंदिर में भगवान शिव का मध्य भाग (नाभि रूप) प्रकट हुआ था, इसलिए इस मंदिर को ‘मध्यमहेश्वर’ नाम दिया गया। यह मंदिर शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है।

मध्यमहेश्वर मंदिर पहुंचने के लिए सबसे पहले आपको हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचना होगा, जहां तक देश के कई हिस्सों से ट्रेन और बस की सुविधा मौजूद है. हरिद्वार से बस या टैक्सी लेकर आप उखीमठ पहुंच सकते हैं. इसके बाद उखीमठ से लोकल टैक्सी लेकर रांसी गांव जाना होता है, जो इस यात्रा का अंतिम मोटर मार्ग है. रांसी गांव से करीब 16 किलोमीटर का ट्रेक शुरू होता है, जो आपको मध्यमहेश्वर मंदिर तक ले जाता है. रास्ते में आप चाहें तो रांसी में रुककर आराम कर सकते हैं और अगली सुबह ताजगी के साथ ट्रेक शुरू कर सकते हैं.

