Divorce Case डिजिटल दौर में आपकी एक फेसबुक पोस्ट या इंस्टाग्राम फोटो केवल ‘लाइक्स’ बटोरने का जरिया नहीं है, बल्कि यह आपके वैवाहिक जीवन को तबाह भी कर सकती है। जयपुर के फैमिली कोर्ट नंबर-1 ने एक बेहद रोचक लेकिन कानूनी रूप से कड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि पत्नी का किसी गैर मर्द के साथ सोशल मीडिया पर रोमांटिक फोटो डालना और उस पर प्यार भरे कमेंट्स प्राप्त करना ‘मानसिक क्रूरता’ है। कोर्ट के इस फैसले ने करीब 10 साल पुरानी शादी की नींव हिला दी और रिश्ते को रद्द करने का आदेश दे दिया।
पत्नी ने खुद को बताया ‘अविवाहित’ Divorce Case

मामला जयपुर के एक दंपत्ति का है, जिनका विवाह 27 नवंबर 2015 को हुआ था। पति के वकील डीएस शेखावत ने बताया कि शादी के अगले दिन से ही पत्नी का व्यवहार असामान्य था। साल 2017 से दोनों अलग रहने लगे। पति ने जब अदालत का दरवाजा खटखटाया, तो उसने सबूत के तौर पर पत्नी की सोशल मीडिया प्रोफाइल पेश की। हैरान करने वाली बात यह थी कि पत्नी ने अपनी प्रोफाइल पर खुद को ‘अविवाहित’ बता रखा था और एक अन्य पुरुष के साथ बेहद रोमांटिक तस्वीरें साझा की थीं।
‘आई लव यू जान’ वाले कमेंट्स ने बिगाड़ा खेल
अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार, उन तस्वीरों पर एक व्यक्ति खुलेआम ‘आई लव यू जान’ जैसे कमेंट्स करता था। पति ने दलील दी कि यह हरकत उसके लिए मानसिक प्रताड़ना और अपमान के समान है। बचाव में पत्नी ने बड़ी ही दिलचस्प दलील दी। उसने माना कि फोटो तो उसी की हैं, लेकिन दावा किया कि वह सोशल मीडिया आईडी उसकी नहीं है। साथ ही उसने उस व्यक्ति को अपना ‘जीजा’ बताया।

‘जीजा था तो गवाही क्यों नहीं दिलाई?’
कोर्ट ने पत्नी के इन तर्कों को ‘कोरी कहानी’ करार दिया। जज ने सवाल उठाया कि अगर वह आईडी पत्नी की नहीं थी, तो उसने फोटो अपलोड करने वाले के खिलाफ पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं की? कोर्ट ने कहा कि अन्य पुरुष के साथ रोमांटिक तस्वीरें पोस्ट करना न केवल वैवाहिक संबंधों के लिए घातक है, बल्कि यह क्रूरता की श्रेणी में आता है। चाहे वह पुरुष रिश्तेदार हो या दोस्त, ऐसा कृत्य वैवाहिक दुर्व्यवहार और अपमान है। अदालत ने यह भी नोट किया कि यदि वह व्यक्ति वास्तव में जीजा था, तो उसे गवाही के लिए कोर्ट क्यों नहीं बुलाया गया ? खबर मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है , अब अगर आप या आपके कोई ख़ास ऐसा अनजाने में करते हैं तो उन्हें सावधान जरूर कर दीजियेगा।

