Male Fertility : कोरोना के कारण पुरुषों के शुक्राणुओं का DNA टूटा – गर्भपात के केस 20% बढ़े , Negative Impact

Male Fertility अगर आपको या आपके किसी परिचित को कोरोना हुआ है, तो ये खबर आपके लिए है। संक्रमण से उबरने के बाद भी कोरोना के मरीजों में कोरोना के दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं। यही नहीं, कोरोना के मरीजों में ये दुष्प्रभाव उसकी संतानों में भी आने की आशंका जताई जा रही है।

Male Fertility
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Male Fertility डीएनए टूटने से गर्भस्थ शिशु में विकृतियों की आशंका

Male Fertility कोरोना संक्रमण का असर
Male Fertility कोरोना संक्रमण का असर

Male Fertility कोरोना संक्रमण का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। चिकित्सकों का कहना है कि संक्रमितों के शरीर में यह वेष बदलकर जिंदा (Covid Stay post ) है। कोरोना वायरस ने जहां पुरुषों के शुक्राणुओं का डीएनए तोड़ दिया है। वहीं यह महिलाओं में गर्भपात का बड़ा कारण भी बन रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण करीब 20 फीसदी महिलाओं में गर्भपात के मामले बढ़े हैं। इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनोकोलॉजिकल इंडोस्कोपिस्टस ( Indian Association of Gynecological Endoscopists) की बैठक में विशेषज्ञों ने रिसर्च के हवाले से इसका खुलासा किया है।

Male Fertility कोरोना संक्रमण का असर
Male Fertility कोरोना संक्रमण का असर

Male Fertility लखनऊ आए चिकित्सकों ने बताया कि पुरुषों में कोरोना का असर फेफड़ों और दूसरों अंगों समेत शुक्राणुओं पर भी पड़ा है। केरल के डॉ. सुभाष माल्या ने बताया कि कोरोना के शुक्राणुओं पर पड़ने वाले असर पर ब्राजील और अमरीका में दो शोध पूरे हो चुके हैं।

Male Fertility कोरोना संक्रमण का असर
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  • शोध में यह भी पता लगाया जा रहा है कि डीएनए टूटने से गर्भस्थ शिशु में किस स्तर की मानसिक विकृतियां पैदा हो सकती हैं। शोध में सामने आया है कि पुरुषों में कोरोना संक्रमण के चलते शुक्राणुओं का डीएनए टूटने की वजह से भ्रूण का विकास नहीं हो पाता, जिससे गर्भपात के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक पिछले महीनों के तुलना में गर्भपात के मामले बढ़े हैं। अब संक्रमित मामलों पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
Male Fertility कोरोना संक्रमण का असर
Male Fertility कोरोना संक्रमण का असर

Male Fertility  निगेटिव होने पर भी बना रहता है वायरस

  • मेरठ के विशेषज्ञ डॉ सुनील जिंदल के अनुसार, यदि टूटे शुक्राणु के साथ महिला गर्भवती हो जाती है तो बच्चे में विकृतियों का डर रहता है। बच्चों में शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की विकृतियां हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना निगेटिव होने के बाद भी वायरस हमारे शरीर में बना रहता है। कोरोना हमारे शरीर के अंदर रूप बदल लेता है। समय समय पर लोगों में कहीं पेट, किडनी, फेफड़े और निमोनिया जैसी बीमारियों का कारण बनता है।

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