Marriage Protect Cancer कैंसर का कारण और खतरा बढ़ाने वाले कारकों को जानने के लिए लगातार शोध होते रहते हैं। अब कैंसर रिसर्च कम्युनिकेशन पर पब्लिश्ड सिल्वेस्टर कंप्रेहेंसिव कैंसर सेंटर की एक स्टडी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कभी शादी ना करने वाले लोगों में कैंसर का खतरा विवाहित लोगों के मुकाबले काफी ज्यादा होता है। बता दें कि शोध करने वाला यह सेंटर यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन का हिस्सा है।
…तो क्या शादी करना जरूरी है ? Marriage Protect Cancer

अविवाहित लोगों में एचपीवी के कारण होने वाले कैंसर का खतरा सबसे अधिक देखा गया। इसकी वजह से अविवाहित पुरुषों में गुदा कैंसर के मामले 5 गुना और अविवाहित महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले 3 गुना अधिक पाए गए। इसके अलावा, इन लोगों में विवाहितों के मुकाबले तंबाकू के कारण होने वाले फेफड़े और खाने की नली के कैंसर के मामले भी काफी थे, जिनके पीछे शराब और धूम्रपान की आदतें हो सकती हैं। पेट, कोलोरेक्टल, हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर), ओवेरियन और एंडोमेट्रियल कैंसर के मामलों में भी इजाफा देखा गया।

क्या कैंसर से बचने के लिए शादी करना आवश्यक है?
इस सवाल का जवाब देते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन ने कहा कि इस स्टडी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि शादी करने से कैंसर से बचा जा सकता है या फिर लोगों को शादी करनी ही चाहिए। सिलवेस्टर सर्वाइवरशिप एंड सपोर्टिव केयर इंस्टीट्यूट (SSCI) के डायरेक्टर और कैंसर सर्वाइवरशिप में सिल्वेस्टर डीसीसी लिविंग प्रूफ एंडोव्ड, एसोसिएट डायरेक्टर ऑफ पॉपुलेशन साइंस के डॉ. फ्रैंक पेनेडो ने कहा, ‘इस शोध का मतलब है कि अगर आप शादीशुदा नहीं है तो आपको कैंसर के रिस्क फैक्टर्स के बारे में जागरुक रहने, स्क्रीनिंग करवाने और अपनी हेल्थ के बारे में अप-टू-डेट रहने की आवश्यकता ज्यादा है।’

इस स्टडी को कितनी गंभीरता से लेना चाहिए?
दिल्ली स्थित एक्शन कैंसर हॉस्पिटल के डायरेक्टर मेडिकल ऑन्कोलॉजी ने इस स्टडी को महत्वपूर्ण बताया है, लेकिन निर्णायक मानने से मना किया है। यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है, जो शादी और कैंसर के बीच का एक संबंध दिखाती है, ना कि सीधा कारण और प्रभाव बताती है। बायोलॉजिकल रूप से शादी कैंसर से बचाव नहीं करती है, बल्कि यह बिहेवियरल, सोशल और इकोनॉमिक फैक्टर का एक प्रोक्सी इंडिकेटर है।
इस स्टडी से शादी को प्रोटेक्टिव थेरेपी समझने की जगह कैंसर के खतरे में लाइफस्टाइल और सोशल फैक्टर्स का महत्व समझें। इस अध्ययन की कई सीमाएं भी हैं, जैसे इसमें उन लोगों की स्थिति समाहित नहीं की गई, जो कानूनी रूप से शादीशुदा ना होने के बावजूद लंबे समय से किसी पार्टनर के साथ रह रहे हैं। ना ही कैंसर के निदान से पहले मरीजों की लाइफस्टाइल का अध्ययन किया गया है। हालांकि, यह भी सच है कि हेल्दी लोगों के शादीशुदा होने की संभावना ज्यादा होती है।

