Married Relationship : लड़कियों को शादी से पहले बतानी चाहिए ये बात – HC , 1 Amazing facts

Married Relationship : आज की युवा पीढ़ी पढ़ीलिखी और वेल क्वालिफाइड है अपने कैरियर और शादी को लेकर बेहद जागरूक भी हो चुकी है। यही वजह है कि लिविंग रिलेशनशिप और कॉन्ट्रैक्ट मैरिज की बाढ़ आ गयी है। लेकिन अक्सर आप ऎसी भी घरेलू विवाद की घटनाये देखते होंगे जहाँ शादी के बाद ही रिश्तों में कड़वाहट आने लगती है और मामला कानून की चौखट तक जा पहुँचता है। ऐसे में एक ताज़ा केस और उस पर कोर्ट की टिप्पणी सुर्ख़ियों में हैं।

Married Relationship पारिवारिक न्यायालयों में केस की भीड़

Married Relationship
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  • Married Relationship ‘अगर एक शादीशुदा महिला को परिवार के लिए घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है तो उसकी तुलना नौकर से नहीं की जा सकती है। अगर महिला घर के काम नहीं करना चाहती तो उसे ये बात शादी से पहले ही बता देनी चाहिए, जिससे होने वाले पति-पत्नी शादी के बारे में दोबारा सोच सकें।’बॉम्बे हाईकोर्ट में 2 जजों की बेंच ने एक मामले में ये बातें कहीं। इस टिप्पणी के साथ ही CrPC की धारा 482 के तहत दर्ज केस खारिज कर दिया। अब आप भी समझिये कि शादीशुदा महिलाओं पर की गई हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के मायने क्या हैं?
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Married Relationship पहले जानते हैं पूरा मामला था क्या ?

  • Married Relationship महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के भाग्यनगर थाने में एक महिला ने एक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में पति और ससुराल वालों पर बड़े आरोप लगाए… और कहा कि शादी के एक महीने बाद ही पति और उसके परिवार वाले महिला के साथ नौकरों जैसा व्यवहार करने लगे।मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ में जस्टिस विभा कंकनवाडी और जस्टिस राजेश पाटिल के सामने पहुंचा। जहाँ एक शानदार फैसला जनता के सामने आया है

आपको जानना चाहिए कि इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला क्या आया है —

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  • Married Relationship हाईकोर्ट ने इस मामले में महिला के आरोपों को खारिज कर दिया। 10 पेज के फैसले में हाईकोर्ट ने ये 6 अहम ऑब्जर्वेशन दिए…केस की कॉपी में लिखा है कि शादी के एक महीने बाद महिला से नौकरानी जैसा व्यवहार किया गया, लेकिन ये आरोप वेग या अस्पष्ट है। महिला ने कथित तौर पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, लेकिन सिर्फ ये 2 शब्द IPC की धारा 498A के तहत दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। जब कि मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने वाले कृत्यों का साफ और स्पष्ट जिक्र न हो।

  • कोर्ट ने  कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि महिला ससुराल छोड़कर आखिर अपने पति के घर क्यों गई? पति से प्रताड़ित किए जाने के 2 महीने बाद महिला ने क्यों केस दर्ज कराया, इस बात का भी केस की कॉपी में जिक्र नहीं है .. अगर एक शादीशुदा महिला को परिवार के लिए घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है तो उसकी तुलना नौकर से नहीं की जा सकती है। अगर महिला घर के काम नहीं करना चाहती तो उसे ये बात शादी से पहले ही बता देनी चाहिए, जिससे होने वाले पति-पत्नी शादी के बारे में दोबारा सोच सकें।

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