Delhi Dehradun Expressway Pothole देहरादून एक्सप्रेस वे पर गड्ढे, वीडियो वायरल

Delhi Dehradun Expressway Pothole दिल्ली से देहरादून के बीच अप्रैल में शुरू हुए एक्सप्रेसवे की हालत बिगड़ गई है। सोशल मीडिया पर गुरुवार को एक वीडियो सामने आया है, जिसमें राजमार्ग पर 2 बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। एक वाहन चालक ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया है। वीडियो में कुछ युवक तेज रफ्तार में गुजरती गाडिय़ों को गड्ढों से बचाने के लिए मदद करते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस ने एक्सप्रेसवे की दुर्दशा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

वीडियो में, वाहन चालक ने दावा किया कि गड्ढों के कारण उसके सामने अब तक 4 से 5 वाहन अपना संतुलन खो बैठे और हादसा होते-होते बाल-बाल बच गया। गड्ढों से टकराने के बाद कम से कम 2 कारों के अलॉय व्हील मुड़ गए। वीडियो में एक वाहन का क्षतिग्रस्त अलॉय व्हील भी दिखाया गया है। यह हालत तब है, जब मानसून की पहली बारिश हुई है। इससे पहले सडक़ की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं।

Delhi Dehradun Expressway Pothole

कांग्रेस ने भाजपा को घेरा
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया था। लेकिन 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस वे में 2 महीने बाद ही बड़े-बड़े गड्ढे हो गए। ये दिखाता है कि इस एक्सप्रेस वे को बनाने में जमकर भ्रष्टाचार और पैसों का बंदरबांट किया गया है।ये पहला ऐसा मामला नहीं है, पूरे देश में पुल हो या सड़क, हाईवे या पानी की टंकी, रेलवे स्टेशन हो या एयरपोर्ट की छत- हर ओर इंफ्रास्ट्रक्चर ढह रहा है। कुल मिलाकर बात साफ है कि मोदी सरकार देश और जनता के लिए घातक है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो वायरल
वहीं करण माहरा ने कहा कि भाजपा सरकार जिस यूपी–दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे को अपनी बड़ी उपलब्धि बताकर उसका प्रचार कर रही थी, वही एक्सप्रेसवे पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं और दावा किया जा रहा है कि एक वाहन भी उसमें फंस गया।करण माहरा ने आगे कहा कि यदि यह सच है, तो यह करोड़ों नहीं बल्कि ₹12,000 करोड़ की परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।क्या यही है भाजपा सरकार का “विश्वस्तरीय विकास”? क्या उद्घाटन और प्रचार पर ज़ोर था, लेकिन गुणवत्ता और जवाबदेही पर नहीं? करदाताओं के हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बाद यदि पहली ही बारिश में ऐसी स्थिति बनती है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।