Right Handed People ज्यादातर इंसान ‘राइट-हैंडेड’ क्यों होते हैं ?

Right Handed People कभी आपने सोचा है कि इस दुनिया में हर 10 में से 9 लोग सीधे हाथ से ही क्यों लिखते हैं, खाना खाते हैं या कोई काम करते हैं ? दुनिया की 90% आबादी का ‘राइट-हैंडेड’ होना इंसानों के सबसे बड़े रहस्यों में से एक रहा है. सदियों से वैज्ञानिक इसके पीछे का कारण ढूंढ रहे थे, क्या यह हमारे खान-पान की वजह से है? समाज की वजह से है? या फिर औजारों के इस्तेमाल की वजह से? अब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक नई और चौंकाने वाली स्टडी ने इस राज से पर्दा उठा दिया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका जवाब हमारे हाथों में नहीं, बल्कि हमारे पैरों और हमारे दिमाग में छिपा है! आइए बिल्कुल ‘क्लियर कट’ समझते हैं कि हम इंसानों का ये ‘राइट-हैंडेड’ होना हमारे विकास (Evolution) की किस कहानी को बयां करता है.”

जानिए पैरों और दिमाग से क्या है कनेक्शन Right Handed People

हाल ही में ‘PLOS Biology’ जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड और यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वैज्ञानिकों ने इंसानों के सीधे हाथ के झुकाव को समझने के लिए एक बहुत बडी रिसर्च की. उन्होंने 41 अलग-अलग प्रजातियों के 2,025 बंदरों और चिंपांजी (Primates) के डेटा का एनालिसिस किया.

वैज्ञानिकों ने पाया कि मकड़ी बंदर (Spider Monkeys) या लंगूरों में कुछ हद तक अपनी पसंद का हाथ इस्तेमाल करने की आदत होती है, लेकिन इंसान इस मामले में पूरी दुनिया में सबसे अनोखे हैं. अगर हम वैज्ञानिकों के ‘मीन हैंडेडनेस इंडेक्स’ (Mean Handedness Index) को देखें, जहां पॉजिटिव नंबर का मतलब सीधे हाथ का झुकाव होता है, तो बाकी सभी प्राइमेट्स जीरो के आसपास आते हैं – यानी वो दोनों हाथों का लगभग बराबर इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इंसानों का स्कोर इस इंडेक्स पर 0.76 है! जो बेहद चौंकाने वाला और बहुत ज्यादा है.”

वो दो फैक्टर्स जिन्होंने सुलझाया रहस्य!

शुरुआत में वैज्ञानिकों ने इसके पीछे कई थ्योरीज का टेस्ट किया. उन्होंने देखा कि क्या खान-पान, रहने का माहौल, शरीर का वजन, सोशल स्ट्रक्चर या औजारों का इस्तेमाल इंसानों को राइट-हैंडेड बनाता है? लेकिन इंसान हर टेस्ट में एक ‘अपवाद’ (Outlier) साबित हुए. ट्विस्ट तब आया जब वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च मॉडल में दो नए फैक्टर्स को जोड़ा – पहला, हमारे दिमाग का साइज (Brain Size) और दूसरा, ‘इंटरमेम्बरल इंडेक्स’ (Intermembral Index) यानी हमारे हाथों और पैरों की लंबाई का अनुपात!

रिसर्च में दिमाग का साइज और हाथों और पैरों की लंबाई का अनुपात को देखा गया.

जैसे ही इन दो चीजों को रिसर्च में शामिल किया गया, इंसानों का यह रहस्यमयी ‘राइट-हैंड’ पैटर्न पूरी तरह समझ में आ गया। हम इंसानों के पैर हमारे हाथों के मुकाबले काफी लंबे होते हैं, जो कि हमारे सीधे खड़े होकर चलने (Walking Upright) की निशानी है.इस स्टडी के प्रमुख रिसर्चर डॉ. थॉमस ए. पुशेल के मुताबिक, हमारा राइट-हैंडेड होना हमारे दो सबसे खास इंसानी गुणों से जुड़ा है: हमारा सीधा खड़ा होकर चलना और हमारे बड़े दिमाग का विकास. जब हमारे पूर्वज पेड़ों से उतरकर जमीन पर सीधे दो पैरों पर चलने लगे, तो हमारे दोनों हाथ पूरी तरह आजाद हो गए. सीधे चलने की वजह से शरीर का संतुलन बदला और पैरों की इस ताकत ने हमारे एक हाथ को दूसरे हाथ के मुकाबले ज्यादा ‘स्पेशलाइज्ड’ यानी माहिर बनाने का मौका दे दिया.

18 लाख साल पुराना सबूत !

वैसे, इंसानों का सीधे हाथ से प्यार कोई नया नहीं है. इतिहास और पुरातत्व (Archaeology) के पास इसके पुख्ता सबूत हैं. तंजानिया में पाए गए 18 लाख साल पुराने ‘होमो हैबिलिस’ (Homo habilis) के जबड़े की हड्डी से पता चलता है कि उनके सामने के दांतों पर सीधे हाथ की तरफ झुकी हुई धारियां थीं. यह इस बात का सबूत है कि वो खाना या कोई चीज प्रोसेस करते समय सीधे हाथ का ही इस्तेमाल करते थे. यही नहीं, पिछले 5 लाख सालों से इंसान औजार बनाने के लिए लगातार सीधे हाथ को ही तवज्जो दे रहा है.यानी कि आज आप जिस सीधे हाथ से पेन पकड़ते हैं या मोबाइल स्क्रॉल करते हैं, उसका कनेक्शन लाखों साल पहले हमारे पूर्वजों के दो पैरों पर खड़े होने के उस ऐतिहासिक फैसले से है जिसने हमें जानवर से इंसान बना दिया. विज्ञान की यह नई खोज हमें बताती है कि हमारी हर छोटी से छोटी आदत के पीछे इवोल्यूशन का एक लंबा और खूबसूरत सफर छिपा है.