Satua Baba भौकाली सतुआ बाबा की लग्जरी देख दुनिया दंग

Satua Baba पीला वस्त्र! गैराज में करोड़ों की डिफेंडर, लैंड रोवर जैसी गाड़ियां और आंखों पर ब्रांडेड चश्मा, कुछ इस लुक में आम तौर पर दिखने वाले सतुआ बाबा इस समय चर्चा में हैं. चर्चा का कारण उनकी नई पोर्श टर्बो गाड़ी है. सोशल मीडिया पर कई लोग उनके इस रईसी को लेकर गुणगान कर रहे हैं तो कुछ उनके विरोध में हैं. विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि एक बाबा इतनी महंगी-महंगी गाड़ियां कैसे अफोर्ड कर सकता है. सतुआ बाबा की तारीफ अक्सर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी करते हैं. तो कौन हैं सतुआ बाबा और कहां से हुई बाबा बनने की शुरुआत?

आइये बताते हैं भौकाली बाबा सतुआ की कहानी Satua Baba

सतुआ बाबा का जन्म बुंदेलखंड के ललितपुर जिले के मसौरा गांव में हुआ. पिता शोभा राम तिवारी और मां राजा बेटी तिवारी की 4 संतानों में सतुआ बाबा सबसे छोटे हैं. बचपन में उनका नाम सतीश तिवारी था. जब सतीश तिवारी 26 साल के हुए तो उनके बड़े भाई महेश तिवारी ने उन्हें अध्यात्म की तरफ जाने के लिए कहा. जिसके बाद वो बनारस सतुआ आश्रम चले आए और यहीं पर दीक्षा लेकर संतोष दास बन गए.

सतुआ आश्रम के महंत यमुनाचार्यजी महाराज ने उन्हें दीक्षा दिलाई और आश्रम में अन्य छात्रों के साथ शिक्षा देने लगे.मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक आश्रम में प्रवेश मिलने के बाद सतीश दास अक्सर छुट्टियों में घर आते रहते थे. उनकी प्रतिभा से महंत यमुनाचार्यजी महाराज काफी प्रभावित हुए. जिसके बाद सतीश दास जल्द ही उनके सबसे प्रिय शिष्यों में शामिल हो गए.


साल 2005 में उन्होंने अपने भाई को फोन कर बताया कि मैं संन्यास ग्रहण कर रहा हूं. उस समय उनके भाई इस बात को हल्के में लिया, लेकिन जब बनारस से कुछ पुजारी ललितपुर किसी मंदिर के अनुष्ठान में पहुंचे तो उन्होंने बताया कि संतोष दास अब सन्यास ले चुके हैं.यह बात सुनकर सतीश दास के बड़े भाई और मां रोने लगीं. उनके पिता चिंता में पड़ गए. मां ने तुरंत यमुनाचार्य जी महाराज को फोन लगाकर उन्हें खूब खरी खोटी सुनाई. मां ने कहा कि मैंने तो अपने बच्चे को आपके यहां पढ़ने भेजा था, लेकिन आपने तो उसे सन्यासी बना दिया?बहुत मुश्किल से यमुनाचार्य जी महाराज ने उन्हें समझाया. ताउम्र सतुआ बाबा की मां इस पीड़ा से गुजरती रहीं और अंत में उनकी मौत हो गई.


सतुआ बाबा के भाई बताते हैं कि उनके सबसे बड़े भाई महेश तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. तब उनकी तेरहवीं में सतुआ बाबा घर आए थे. जानकारी के मुताबिक अब सतुआ बाबा के पिता, बड़े भाई की पत्नी की भी मौत हो चुकी है. उनकी मां भी 2023 में चल बसीं. उन्होंने सतुआ बाबा के आश्रम में ही अपनी आखिरी सांस ली.