Underground Farming खेती के लिए आमतौर पर खुली जमीन, धूप, पानी और सही मौसम की जरूरत होती है. लेकिन क्लाइमेट चेंज के दौर में यही चीजें किसानों के लिए चुनौती बनती जा रही हैं. कहीं सूखा फसल खराब कर देता है तो कहीं ज्यादा बारिश पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है.साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के वैज्ञानिक अब इसी समस्या का एक अलग रास्ता खोज रहे हैं. उनका आइडिया है कि खेती को जमीन के ऊपर करने के बजाय जमीन के नीचे ले जाया जाए. इसके लिए बंद हो चुकी कोयला खदानों का इस्तेमाल किया जा सकता है. खदानों में मौजूद बड़ी खाली जगह को एक तरह के हाईटेक फार्म में बदला जाएगा, जहां फसल के लिए जरूरी रोशनी, पानी, तापमान और हवा को इंसान अपने हिसाब से कंट्रोल कर सकेगा. हालांकि, इसका मकसद सिर्फ अनाज उगाना नहीं, बल्कि भविष्य की स्पेस कॉलोनियों के लिए खेती की टेक्नोलॉजी तैयार करना भी है.
आ गया जमीन के अंदर खेती करने का चाइनीज फॉर्मूला Underground Farming

जमीन के कई मीटर नीचे सूरज की रोशनी पहुंचना संभव नहीं है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पौधे बढ़ेंगे कैसे? वैज्ञानिकों के प्लान में इसका जवाब आर्टिफिशियल लाइटिंग है. इसका मतलब खदान के अंदर ऐसी लाइट लगाई जाएगी, जो पौधों को ग्रो करने के लिए जरूरी रोशनी देगी. इस काम में खदानों का पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर भी मदद कर सकता है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कई खदानों में पहले से पावर सप्लाई और वेंटिलेशन सिस्टम मौजूद हैं. इन्हें खेती की जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करने की संभावना देखी जा रही है. इसका मतलब बाहर चाहे रात हो या दिन, बारिश हो या तेज धूप, जमीन के नीचे मौजूद पौधों के लिए एक अलग ही मौसम तैयार किया जा सकेगा.

गर्मी के लिए धरती की एनर्जी
जमीन के अंदर एक और फायदा है. यहां का तापमान खुले मैदान की तरह लगातार तेजी से ऊपर-नीचे नहीं होता. वैज्ञानिक इस स्थिर वातावरण का फायदा उठाने की योजना बना रहे हैं. इसके लिए जियोथर्मल एनर्जी यानी धरती के अंदर मौजूद गर्मी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे अंडरग्राउंड फार्म में पौधों के लिए जरूरी तापमान बनाए रखने में मदद मिलेगी. साथ ही पारंपरिक फ्यूल पर निर्भरता कम करने और ग्रीनहाउस गैसों के एमिशन को घटाने की कोशिश भी की जा सकती है. इसका मतलब जिस खदान को कभी कोयला निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, वही जगह आगे चलकर क्लीन एनर्जी और खेती के एक्सपेरिमेंट का सेंटर बन सकती है.
जहरीले पानी को भी बनाया जाएगा यूजफुल

कोयला खदानों में सिर्फ खाली जगह ही नहीं होती. वहां जमा पानी भी एक बड़ी समस्या बन सकता है. कई बार इस पानी में ऐसे केमिकल और हैवी मेटल्स पाए जा सकते हैं, जिन्हें सीधे खेती में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. वैज्ञानिक इस समस्या के लिए पानी को साफ करने वाली तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं. मेम्ब्रेन सेपरेशन जैसी टेक्नोलॉजी के जरिए पानी से नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को अलग करने की कोशिश होगी. इसके बाद साफ किए गए पानी का इस्तेमाल कुछ फसलों की सिंचाई में किया जा सकता है. रिपोर्ट में चाय और रेपसीड जैसी फसलों का भी जिक्र किया गया है. हालांकि, कौन सी फसल जमीन के नीचे इस सिस्टम में सबसे अच्छी तरह उग सकती है, यह भी रिसर्च का हिस्सा होगा.

आसान नहीं होगी जमीन के नीचे खेती
अंडरग्राउंड फार्म का आइडिया सुनने में जितना शानदार लगता है, इसे असल में लागू करना उतना ही आसान नहीं होगा. आर्टिफिशियल लाइटिंग के लिए बड़ी मात्रा में बिजली चाहिए. तापमान और हवा को कंट्रोल करने के लिए भी लगातार एनर्जी की जरूरत होगी. इसके अलावा खदानों की सेफ्टी, पानी की क्वालिटी और अंदर काम करने वाले लोगों की सुरक्षा भी अहम मुद्दे होंगे. इसलिए फिलहाल इसे बड़े पैमाने की खेती का तैयार मॉडल मानना जल्दबाजी होगी. वैज्ञानिक पहले यह समझना चाहते हैं कि बंद खदानों को किस तरह सुरक्षित और उपयोगी एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर में बदला जा सकता है.

