Underwear Economics पुरुषों की अंडरवियर किसी देश की आर्थिक हालत को बयां करती है, इसे पढ़कर अजीब लग सकता है। लेकिन यह ऐसी हकीकत हैं, जिस पर दुनिया भर के अर्थशास्त्री नजर रखते हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पुरुष उसी समय अंडरवियर की खरीद से परहेज करते हैं, जब उनकी कमाई गिरती है और उन्हें दूसरे खर्च के लिए अपनी इस अहम जरूरत में कटौती करनी पड़ती है।
Underwear Economics अंडरवियर की बिक्री है अंदर की बात !

- वित्त वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही में भारत में पुरुष अंडरवियर की बिक्री में गिरावट ने आर्थिक विशेषज्ञों के कान खड़े कर दिए हैं. देश के पुरुषों के अंडरवियर कम खरीदने को वे अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं मान रहे हैं. उनका मानना है कि कच्छों की घटी बिक्री लोगों के हाथ तंग होने का इशारा है. अमेरिका के फेडरल रिजर्व के पूर्व प्रमुख ऐलन ग्रीनस्पैन द्वारा बनाए मेंस अंडरवियर इंडेक्स के अनुसार, जब किसी देश में पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले अंडरवियर की बिक्री में गिरावट आती है, तो वह अर्थव्यवस्था में मंदी आने का संकेत होती है.

Underwear Economics अमेरिकी फेड रिजर्व मानते हैं अहम संकेत
Underwear Economics अमेरिकी फेड रिजर्व के पूर्व चेयरमैन एलन ग्रीन स्पेन के अनुसार, पुरुषों के अंडरवियर की बिक्री का आंकड़ा एक अहम आर्थिक संकेत है। इसके लिए उन्होंने एक अंडरवियर इंडेक्स भी तैयार किया है। उनके अनुसार पुरुषों का अंडरवियर सबसे प्राइवेट कपड़ा होता है और वह छिपा हुआ होता है, ऐसे में आर्थिक मोर्चे पर हालात टाइट होने पर कोई भी व्यक्ति अंडरवियर नहीं बदलता है। ग्रीन स्पैन की इस बात को अमेरिका में 2007 से लेकर 2009 के दौरान अंडरवियर की गिरी बिक्री मजबूत करते हैं। क्योंकि इस दौरान अमेरिका सहित पूरी दुनिया में मंदी छाई थी।
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