Uttarakhand Sadan राम की अयोध्या में देवभूमि बसा रहे डॉ. आर. राजेश कुमार

देहरादून से आशीष तिवारी की रिपोर्ट –

Uttarakhand Sadan एक लक्ष्य एक जुनून और जिम्मेदारी को खुद कंधे पर लेकर निकल पड़ना ही आईएएस डॉ. आर. राजेश कुमार की कार्यशैली की पहचान है। विभाग बदले , जिम्मेदारियाँ बदली लेकिन जुनून हर डैम तरोताजा और आगे बढ़कर फील्ड में एक्शन लेना ही इनकी खूबी है। अब ये अनुभवी ब्यूरोक्रेट राम की नगरी अयोध्या में देवभूमि की आकार देने के लिए शिल्पकार बन गए हैं। आवास व राज्य सम्पति सचिव की जिम्मेदारी संभालने के बाद से डॉ. आर. राजेश कुमार ने जिस कार्यशैली को स्थापित किया है, वह पारंपरिक प्रशासनिक ढर्रे से अलग, सीधे परिणाम पर केंद्रित और समयबद्ध क्रियान्वयन की मिसाल बनती जा रही है। जिन विभागों को कभी महज औपचारिक माना जाता था, वे आज उनकी सक्रियता और सख्त मॉनिटरिंग के चलते न केवल गति में हैं, बल्कि नतीजों के साथ चर्चा के केंद्र में भी हैं। इसी का प्रत्यक्ष उदाहरण है राम नगरी अयोध्या में आकार लेता उत्तराखंड राज्य अतिथि गृह।

अयोध्या में उत्तराखंड की पहचान गढ़ते डॉ. आर. राजेश कुमार Uttarakhand Sadan


मुख्यमंत्री धामी के विजन और देवभूमि के लाखों राम भक्तों की भावना को जल्द से जल्द धरातल पर साकार करने के लिए अयोध्या जैसे राष्ट्रीय महत्व के धार्मिक केंद्र में इस परियोजना को जिस गंभीरता और रणनीतिक दृष्टि के साथ डॉ. आर. राजेश कुमार आगे बढ़ा रहे है, वह इसे एक साधारण निर्माण कार्य से कहीं आगे ले जाता है। यह उत्तराखंड की संस्थागत मौजूदगी दर्ज कराने की सोची-समझी पहल है। डॉ. राजेश कुमार का स्थल निरीक्षण महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का स्पष्ट संकेत था- गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं और समयसीमा पर कोई ढिलाई नहीं।

करीब 54,000 वर्ग फीट में विकसित हो रहा यह अतिथि गृह केवल ठहरने का स्थान नहीं, बल्कि उत्तराखंड से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक भरोसेमंद आधार केंद्र बनने जा रहा है। महत्वपूर्ण यह भी है कि इसे वीआईपी दायरे से बाहर निकालकर आम श्रद्धालुओं की सुविधा को केंद्र में रखा गया है, यही इसे वास्तविक अर्थों में जनोन्मुख बनाता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास से जोड़ने की नीति को जिस गंभीरता से धरातल पर उतारा जा रहा है, उसमें डॉ. राजेश कुमार एक सशक्त क्रियान्वयनकर्ता के रूप में उभरते हैं- जहां योजना केवल बनती नहीं, समय पर पूरी भी होती है।साफ है, यह परियोजना केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, उसकी सांस्कृतिक उपस्थिति और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है। और जब नेतृत्व फील्ड में उतरकर काम करता है, तो योजनाएं फाइलों में नहीं, जमीन पर नजर आती हैं।शाइनिंग समाचार मीडिया ग्रुप को ही नहीं उत्तराखंड के लाखों लोगों को अब इंतज़ार है तो अयोध्यापुरी में भव्य अतिथि गृह के आकार लेने की जिससे तीर्थटन को रफ़्तार मिल सकेगी।