Manusmriti महिलाओं के लिए मनुस्मृति में क्या लिखा है ?

Manusmriti कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के बयान से एक बार फिर मनुस्मृति पर नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता ने मनुस्मृति की आलोचना करते हुए इसे महिला विरोधी बताया। महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बोलते हुए राहुल गांधी ने मनुस्मृति का जिक्र किया। इसके बाद भाजपा नेता ने उनके बयान पर पलटवार किया।मनुस्मृति में महिलाओं को लेकर लिखे गए एक उद्धरण (Citation) को शर्मनाक बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि महिलाएं किसी के अधीन नहीं हो सकती हैं। यह एक काफी बड़ी समस्या है, मैं जब भी पुरुषों से बात करता हूं, महिलाओं को तीन बॉक्स बेटी, पत्नी या मां के रूप में रखा जाता है।

मनुस्मृति में क्या लिखा गया है ? Manusmriti 

विवाह – इसमें विवाह को मुख्य रूप से प्रजनन के लिए एक अनुबंध के रूप में बताया गया है, जिसमें महिलाओं को पुरुषों के अधीन दिखाया गया है

महिलाओं की भूमिकाएं – बकौल मनुस्मृति, महिलाओं से आज्ञाकारी होने और घरेलू कर्तव्यों को पूरा करने की अपेक्षा की जाती है; उनकी स्वायत्तता सीमित है. ये एक पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, यह निर्धारित करती है कि महिलाओं को अपने पूरे जीवन में पुरुष अभिभावकों – पिता, पति और पुत्र के नियंत्रण में रहना चाहिए. यह महिलाओं की घरेलू भूमिकाओं और आज्ञाकारिता पर जोर देती है. ये बात आधुनिक नारीवादी आंदोलनों के साथ टकराव का कारण बनती है

मनुस्मृति को मनुसंहिता के नाम से भी जाना जाता है. इसकी रचना 200 ईसा पूर्व और 300 ईस्वी के बीच हुई. इसके 12 अध्यायों में 2,685 श्लोक हैं. ये हिंदू कानून और सामाजिक मानदंडों के लिए एक आधार का काम भी करती है.इसे प्राचीन भारत में समाज, धर्म, और कानून से संबंधित नियमों का संकलन माना जाता था. इसे संस्कृत भाषा में लिखा गया. ये श्लोकों के रूप में है. यह हिंदू धर्म में “धर्मशास्त्र” की श्रेणी में आता है

मनुस्मृति के पांचवें अध्याय के 148वें श्लोक में लिखा गया है कि एक लड़की हमेशा अपने पिता के संरक्षण में रहनी चाहिए, शादी के बाद पति उसका संरक्षक होना चाहिए, पति की मौत के बाद उसे अपने बच्चों की दया पर निर्भर रहना चाहिए, किसी भी स्थिति में एक महिला आजाद नहीं हो सकती। ये महिलाओं के बारे में मनुस्मृति की राय साफ तौर पर बताती है। मनुस्मृति में दलितों और महिलाओं को लेकर भी ऐसे कई श्लोक लिखे गए हैं, जिसकी वजह से हमेशा बहस होते रहता है। मनुस्मृति में लिखी हुई बातों को लेकर पिछले कई सालों से विवाद होते रहे हैं। लेकिन क्या मनुस्मृति सच में इतनी विवादित किताब है?

‘मनुस्मृति में शूद्रों को शिक्षा का अधिकार नहीं’

वर्णों की अनुसार, यही कारण है कि ब्राह्मणों को कम सजा मिलती थी, लेकिन अन्य लोगों को कड़ी सजा का प्रावधान था। इस किताब में कहा गया कि किसी भी स्थिति में ब्राह्मणों का सम्मान होना चाहिए। किसी भी महिला का कल्याण तभी होगा, जब एक पुरुष का कल्याण हो। एक महिला का कोई धार्मिक अधिकार नहीं है। वह अपने पति की सेवा करके स्वर्ग प्राप्त कर सकती है।मनुस्मृति में ‘शूद्रों’ को शिक्षा पाने का अधिकार नहीं था। उस वक्त शिक्षा का माध्यम मौखिक हुआ करती थी। यही कारण है कि कुछ ब्राह्मणों को छोड़कर किसी को ये नहीं पता था कि मनुस्मृति क्या है। ब्रिटिश काल में ये किताब कानूनी मामलों में इस्तेमाल के कारण चर्चाओं में आई। विलियम जोनास ने मनुस्मृति का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। जिसके बाद इस किताब के बारे में पता चला।