Karna not get Food in Heaven दानवीर कर्ण को स्वर्ग में क्यों नहीं मिला खाना ?

Karna not get Food in Heaven  महाभारत के चर्चित पात्रों में से एक दानवीर कर्ण को उनकी दरियादिली के लिए आज भी याद किया जाता है. माना जाता है कि कर्ण के दरवाजे से कोई भी याचक कभी खाली हाथ नहीं लौटता था. जीवनभर दान करने वाला इतना बड़ा योद्धा आखिर स्वर्ग में भूख से क्यों तड़पने लगा ? इसके पीछे एक पौराणिक कारण है जिसका सीधा संबंध आज के पितृपक्ष से जुड़ा हुआ है.

स्वर्ग पहुंचकर भूखे क्यों तड़पने लगे दानवीर कर्ण ? Karna not get Food in Heaven 

महाभारत युद्ध में वीरगति को प्राप्त होने के बाद जब कर्ण की आत्मा स्वर्ग लोक पहुंची, तो वहां उनके दान के बदले अपार धन-दौलत मिली. लेकिन जब भी कर्ण को भूख लगती और वे भोजन मांगते, तो उनके सामने खाने की जगह सोना, रत्न और गहने रख दिए जाते. कर्ण इस बात से बहुत हैरान और परेशान हुए. जाहिर है कि कोई भी इंसान या आत्मा भूख मिटाने के लिए सोना-चांदी तो खा नहीं सकती. जब कई दिनों तक उन्हें भोजन नहीं मिला, तो उन्होंने स्वर्ग के देवराज इंद्र से इस अजीब परेशानी का कारण पूछा.

देवराज इंद्र ने बताया अन्न दान न करने का कारण

कर्ण के सवाल पूछने पर देवराज इंद्र ने उन्हें इसके पीछे का असली नियम समझाया. इंद्रदेव ने कहा कि तुमने अपने पूरे जीवन में केवल सोना, चांदी, धन और कीमती वस्त्रों का ही दान किया है. तुमने कभी अपने पूर्वजों के नाम पर अन्न और जल का दान नहीं किया. हिंदू मान्यताओं में पूर्वजों के निमित्त अन्न और जल दान करना सबसे बड़ा धर्म माना जाता है.

इंद्रदेव ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति जिस चीज़ का दान जीवित रहते करता है, मृत्यु के बाद उसे स्वर्ग में वही वस्तु प्राप्त होती है.इंद्रदेव की बात सुनकर कर्ण ने बहुत दुखी मन से अपनी मजबूरी बताई. कर्ण ने कहा कि उन्हें अपने वास्तविक जन्म, माता कुंती और अपने असली कुरु वंश के बारे में जीवन के अंतिम पड़ाव में जाकर पता चला था. अपने कुल और पूर्वजों की जानकारी न होने के कारण वे कभी अपने पितरों का श्राद्ध, तर्पण या उनके नाम पर अन्न दान नहीं कर सके. कर्ण ने कहा कि इसमें उनकी कोई बदनीयती नहीं थी, बल्कि वे तो अपने असली कुल से पूरी तरह अनजान थे.

16 दिनों के लिए धरती पर वापस लौटे कर्ण

कर्ण की यह निष्पाप बात सुनकर देवताओं का दिल पिघल गया. उन्हें अपनी भूल सुधारने का एक मौका दिया गया. पौराणिक कथा के अनुसार कर्ण को 16 दिनों की अवधि के लिए वापस धरती पर भेजा गया. इन 16 दिनों में कर्ण ने पूरी विधि-विधान के साथ अपने पूर्वजों को याद किया. उन्होंने अपने पितरों के नाम पर गरीबों को डटकर अन्न खिलाया, जल का दान किया और तर्पण किया. इसके बाद जब कर्ण वापस स्वर्ग लौटे, तो उन्हें पेट भरकर भोजन और तृप्ति प्राप्त हुई.इसी वजह से 16 दिनों की इस विशेष अवधि को पितृपक्ष या श्राद्ध पक्ष के रूप में मनाया जाने लगा. मान्यता है कि इस दौरान पूर्वजों के नाम से अन्न-जल का दान करने से घर में बरकत बनी रहती है.