Pitru Paksha 2026 पितृपक्ष में क्या बेटी कर सकती है श्राद्ध और पिंडदान ?

Pitru Paksha 2026

सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. 16 दिनों तक चलने वाले इस काल में हम अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहे. पितृपक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा जताने का खास समय माना जाता है. साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा. मान्यता है कि इस दौरान पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, लेकिन अगर लड़का नहीं है तो क्या लड़की श्राद्ध-पिंडदान कर सकती है?

माता सीता की पिंडदान कथा क्यों होती है याद ? Pitru Paksha 2026

महिलाओं द्वारा पिंडदान की चर्चा होने पर गया की माता सीता से जुड़ी प्रसिद्ध धार्मिक कथा का उल्लेख किया जाता है. मान्यता है कि फल्गु नदी के किनारे माता सीता ने अपने ससुर राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था. प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गया पहुंचे थे और वहां राजा दशरथ के निमित्त श्राद्ध कर्म किया जाना था. इसी दौरान श्रीराम और लक्ष्मण सामग्री लेने चले गए. मान्यता है कि राजा दशरथ ने माता सीता से पिंड की इच्छा प्रकट की, जिसके बाद उन्होंने फल्गु नदी की रेत से पिंड बनाकर अर्पित किया. गया में स्थित सीता कुंड को इसी कथा से जोड़ा जाता है.

क्या बेटी कर सकती है श्राद्ध और पिंडदान ? 

श्राद्ध कर्म की विधि सभी परिवारों, संप्रदायों और क्षेत्रों में एक जैसी नहीं होती. सामान्य धार्मिक परंपरा में पुत्र को श्राद्ध का प्रमुख कर्ता माना जाता है, लेकिन पुत्र न होने या योग्य पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध न होने की स्थिति में महिला द्वारा श्राद्ध कर्म किए जाने की परंपराओं का भी उल्लेख मिलता है. कुछ परिवारों में विवाहित बेटी अपने माता-पिता के लिए श्राद्ध या पिंडदान की जिम्मेदारी निभाती है. वहीं कुछ परंपराओं में पत्नी, बहू या परिवार के अन्य सदस्य को यह दायित्व सौंपने की व्यवस्था भी बताई गई है. इसलिए ऐसी स्थिति में अपने कुल और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार विद्वान आचार्य से विधि की जानकारी लेना उचित माना जाता है.

श्राद्ध और पिंडदान में क्या अंतर है ?

श्राद्ध एक व्यापक धार्मिक कर्म है, जिसका उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करना माना जाता है. इसमें तर्पण, पिंड अर्पण, भोजन और दान-पुण्य जैसे कर्म शामिल हो सकते हैं. वहीं पिंडदान में पिंड के रूप में पितरों को अर्पण किया जाता है. पितृपक्ष के दौरान परिवार अपनी परंपरा के अनुसार संबंधित तिथि पर अपने पूर्वजों का श्राद्ध करता है और उनके निमित्त तर्पण-पिंडदान करता है.

पितृपक्ष 2026 कब से शुरू होगा ?

साल 2026 में भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा का श्राद्ध 26 सितंबर, शनिवार को होगा. इसके बाद आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से 27 सितंबर को पितृपक्ष के क्रमिक श्राद्ध शुरू होंगे. द्रिक पंचांग के अनुसार प्रतिपदा से अमावस्या तक अलग-अलग तिथियों पर पितरों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाएंगे. पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा.