Science facts तपती गर्मी के बाद जब बारिश की पहली बूंदें सूखी धरती पर गिरती हैं, तो मिट्टी से आने वाली वह सोंधी खुशबू सीधा दिल को सुकून पहुंचाती है। हम सभी को यह महक बहुत पसंद होती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह खुशबू आखिर आती कहां से है? आपको जानकर हैरानी होगी कि यह सिर्फ एक सुखद अहसास नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद रोचक वैज्ञानिक कारण छिपा है। आइए जानते हैं क्या है यह विज्ञान और क्यों हमें इस मौसम में थोड़ी सावधानी बरतने की भी जरूरत है।
क्या है सोंधी महक का राज? Science facts

डॉ. के अनुसार, जब मिट्टी लंबे समय तक सूखी रहती है, तो उसमें दो अहम चीजें काम कर रही होती हैं……
पौधों का नेचुरल ऑयल: सूखे के मौसम में पौधों से निकलने वाले कुछ नेचुरल ऑयल मिट्टी में जमा हो जाते हैं। सूक्ष्म जीव: मिट्टी के अंदर ‘एक्टिनोमाइसीट्स’ नाम के विशेष सूक्ष्म जीव रहते हैं।ये नेचुरल ऑयल और सूक्ष्म जीव आपस में मिलकर एक खास कंपाउंड तैयार करते हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘जिओस्मिन’ कहा जाता है।जब बारिश की बूंदें जमीन पर गिरती हैं, तो यह ‘जिओस्मिन’ हवा में बहुत ही सूक्ष्म कणों के रूप में चारों तरफ फैल जाता है। हवा में तैरते हुए जब ये कण हमारी सांसों तक पहुंचते हैं, तो हमें वही चिर-परिचित सोंधी महक महसूस होती है। विज्ञान में इस पूरी प्रक्रिया और बारिश की इस खास खुशबू को ‘पेट्रिकोर’ का नाम दिया गया है।

सुकून के साथ जरूरी है थोड़ी सावधानी यूं तो बारिश की यह खुशबू मन को बहुत शांति देती है, लेकिन डॉ. भाटिया चेतावनी देती हैं कि बारिश के शुरुआती दिनों में हवा में कुछ ऐसे तत्व भी बढ़ जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
फफूंद परागकण अन्य एलर्जेन
किन लोगों को है ज्यादा खतरा? हवा में इन एलर्जेन के बढ़ने से उन लोगों को विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए जो पहले से ही कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जैसे:
अस्थमा के मरीज सांस संबंधी बीमारियों वाले लोग किसी भी तरह की एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति
आपको बता दें कि बारिश की बूंदों में किसी तरह की कोई खुशबु नहीं होती है. दरअसल, जब बारिश की बूंदे धरती पर गिरती हैं और मिट्टी के कणों से जाकर मिलती हैं, उस समय एक प्रकार की सौंधी और भीनी-भीनी खुशबू आती है. इस भीनी-भीनी खुशबू को ‘पेट्रिकोर’ (petrichor) कहते है. पेट्रिकोर शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द पेट्रा से की गई है, जिसका अर्थ स्टोन या आइकर है.

