Special Story By : Priyanshu Dwivedi , Uttar Pradesh –
Wife 3000 Alimony Case यूँ तो तलाक़ के केस में पति ही हमेशा पत्नी को गुज़रा भत्ता देता है लेकिन इस मामले में थोड़ा उलटा है यहाँ पत्नी को अपने पति को तलाक़ के बाद गुज़ारा भत्ता देना होगा।

Wife 3000 Alimony Case इस खबर को पढ़िए और अदालत के फैसले को अच्छे से समझ लीजिये

- Wife 3000 Alimony Case देश में ऐसी रोचक मामले कम ही आते हैं लेकिन जब आते हैं तो नज़ीर बन जाते हैं। औरंगाबाद में अलग मामला सामने आया है… बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने एक महिला को आदेश दिया है कि वह अपने पूर्व पति को 3 हजार रुपये गुजारा भत्ता (Alimony) दे… महिला जिस स्कूल में टीचर (Teacher) की नौकरी करती है, उसे भी कोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला की सैलरी से हर महीने 5 हजार रुपये काटे जाएं और उन्हें अदालत में जमा कराया जाए….

- Wife 3000 Alimony Case ऐसा इसलिए कि महिला ने अदालत के आदेश के बावजूद अगस्त 2017 से अपने अलग रह रहे पति को गुजारा भत्ता नहीं दिया है… हाईकोर्ट ने ये आदेश देते हुए महिला की उस दलील को भी खारिज कर दिया कि उसका पति से तलाक पहले ही हो चुका था और गुजारा भत्ता देने का आदेश उसके बाद जारी हुआ था….
Wife 3000 Alimony Case महिला की सैलरी से काटें 5 हजार रुपये महीना

- Wife 3000 Alimony Case औरंगाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस भारती डांगरे की बेंच ने इस केस में नांदेड़ (Nanded) की निचली अदालत के आदेशों को सही करार दिया…. नांदेड़ में सेकंड जॉइंट सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने अगस्त 2017 में महिला को आदेश दिया था कि केस की सुनवाई पूरी होने तक वह अपने पूर्व पति को हर महीने 3 हजार रुपये का अंतरिम गुजारा भत्ता दे क्योंकि उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और महिला स्कूल में टीचर की नौकरी करती है… जब महिला ने इस आदेश का पालन नहीं किया तो अदालत ने दिसंबर 2019 में उसके स्कूल की हेडमास्टर के नाम आदेश जारी किया कि वह हर महीने 5 हजार रुपये महिला की सैलरी से काटकर कोर्ट में जमा कराए क्योंकि उसने पिछला गुजारा भत्ता भी नहीं दिया है....
Wife 3000 Alimony Case तलाक के बाद भी मिल सकता है भत्ता

- Wife 3000 Alimony Case महिला ने इस आदेश के खिलाफ औरंगाबाद हाईकोर्ट में अपील की… उसने अपनी दलील में कहा कि उसकी शादी 1992 में हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद ही वह अलग हो गई… 2015 में अदालत ने उनका तलाक भी मंजूर कर लिया था…. नांदेड़ सिविल जज का आदेश तलाक पारित होने के बाद आया है, जो कानून की नजर में ठीक नहीं है…. इस पर पति की तरफ से हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 25 का हवाला देते हुए कहा गया है कि पति या पत्नी की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अदालत उनमें से किसी को भी गुजारा भत्ता देने का आदेश दे सकता है और ये आदेश उनके बीच तलाक होने से प्रभावित नहीं होता….
- पढ़िए ये रोचक खबर – हरीश रावत जायेंगे भाजपा में ! https://shininguttarakhandnews.com/harish-rawat-bjp/

