ये है रावण का गांव? जहाँ रोते हैं लोग

नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और बस कुछ ही दिनों में दशहरा का पर्व मनाया जाएगा. इस मौके पर देशभर में रावण के पुतले को जलाया जाता है. इस पर्व को बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है. लेकिन देश में एक गांव ऐसा भी है जहां दशहरा पर उत्साह नहीं बल्कि शोक मनाया जाता है. अगर आप इस दशहरा पर अपने बच्चों को किसी एतिहासिक जगह घूमाना चाहते हैं तो आप उन्हें इस जगह लेकर जा सकते हैं.

कहां है ये गांव और क्या है इतिहास?
ये गांव उत्तरप्रदेश के ग्रेटर नोएडा नें स्थित है. इस गांव का नाम बिसरख है. पौराणिक कथाओं के अनुसार बिसरख गांव का नाम रावण के पिता ऋषि विश्रवा के नाम पर पड़ा था. गांव का प्राचीन नाम विश्वेशरा था जो बदलकर बिसरख हो गया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शिवपुराण में भी इस जगह का जिक्र मिलता है. इसमें बताया गया है कि ऋषि विश्रवा का यहीं जन्म हुआ था और उन्होंने ही शिवलिंग की स्थापना की थी.


दशहरा पर देशभर में रावण का पुतला जलाकर रावण दहन किया जाता है, लेकिन बिसरख गांव में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिलता है. इस दिन यहां रावण की मृत्यु पर शोक जताया जाता है. मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार दशहरा के मौके पर इस गांव में रावण दहन नहीं होता है लेेकिन यज्ञशाला के सामने रावण की मूर्ति रखकर हवन और पूजा की जाती है. साथ ही बिसरख में रहने वाले निवासी रावण को अपने पूर्वज, अपना बाबा मानते हैं. इसी कारण यहां उनकी पूजा की जाती है.

दूर-दूर तक पहुंची गांव बिसरख की कहानी
बिसरख गांव की मान्यता पहले लगभग स्थानीय स्तर तक ही लोगों को पता थी. लेकिन सोशल मीडिया और इंटरनेट के दौर मेंं रील्स और वीडियोज से इस गांव की कहानी दूर-दूर तक पहुंच गई है. यहां लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं. साथ ही अब ये मंदिर न केवल आस्था का, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है.