1 Amazing World दिमाग मत खाओ , क्यों मेरा दिमाग खा रहे हो ? ये आप अक्सर बोलते होंगे लेकिन क्या यकीन करेंगे कि कुछ लोग ऐसा हकीकत में करते हैं। हम आपको ऐसे ही एक समुदाय की कहानी बता रहे हैं जो दिमाग खाकर मौत की दावत करते हैं। हर समुदाय में अंतिम संस्कार को लेकर अलग-अलग प्रथाएं निभाई जाती है। लेकिन शायद ही किसी ने सुना होगा कि अंतिम संस्कार के दौरान लोग इंसानी मांस खाते हैं। खासकर मृतक का दिमाग। पढ़ कर कांप गए ना। आइए उस जनजाति के बारे में बताते हैं।
1 Amazing World अंतिम संस्कार में मृतक के शरीर की होती थी दावत

- 1 Amazing World ‘दिमाग खाना’ हमारे यहां भले ही कहावत हो, लेकिन एक ऐसी जनजाति है जहां पर अंतिम संस्कार में दिमाग खाने की प्रथा थी। पापुआ न्यू गिनी में करीब 312 जनजातियां रहती हैं। जिनके अजीबो गरीब रिवाज होते हैं। इसी में से एक जनजाति में इंसान का मांस और दिमाग खाने की प्रथा थी। जिसकी वजह से वहां के लोगों में एक बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है। मेडिकल टीम इनपर जांच कर रही है.

- 1 Amazing World ब्रिटेन और पापुआ न्यू गिनी के वैज्ञानिक ने फोर जनजाति (Fore Tribe) के लोगों पर शोध किया। इसमें पता चला कि आदिवासी जिनके आहार में मृतक के दिमाग शामिल था, उनमें कुरु नामक बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है। वहां के लोगों में इस बीमारी से लड़ने की आनुवंशिक प्रतिरोधक क्षमता (Genetic resistance) हो गई है। वैज्ञानिकों को इस शोध से पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया जैसे ‘प्रायन’ रोगों के नए ट्रीटमेंट में मदद मिल सकती है

- 1 Amazing World फोर जनजाति में पहले जब अंतिम संस्कार होता था तो दावत के दौरान पुरुष मृतक का मांस खाते थे वहीं,महिलाएं उनका दिमाग। इसे प्रथा के जरिए लोग अपने प्रियजनों के प्रति सम्मान प्रकट करते थे। उनका कहना था कि अगर शरीर को दफनाया जाता है या किसी जगह पर रखा जाता है तो कीड़े खाते हैं। इससे अच्छा है कि शरीर को वो लोग खाएं जो उनसे प्यार करते हैं।मृतक के शरीर से दिमाग को निकालकर महिलाएं उसमें फर्न मिलाती थी और उसे बांस में पकाया जाता था। शोध में कहा गया है कि गाल ब्लैडर छोड़कर वो लोग सब कुछ भूनकर खा जाते थे।
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