Story By – Anita Tiwari , Uttarakhand –

parole for child birth एक कैदी अजमेर (Ajmer) की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है… उसकी शादी हो चुकी है, लेकिन कोई संतान नहीं है…. पत्नी शादी से खुश है और बच्चा चाहती है…

parole for child birth : कैदी को बच्चा पैदा करने के लिए कोर्ट से मिला 15 दिन
- इसलिए उसने अजमेर (Ajmer) कलेक्टर (Collector) को अर्जी दी, लेकिन संतान उत्पत्ति के लिए उसके पति को पैरोल दी जाए…. वहां से कोई जवाब नहीं मिलने पर उसने हाईकोर्ट की शरण ली… हाईकोर्ट के न्यायाधीश (judge) संदीप मेहता व फरजंद अली की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए 15 दिन की पैरोल मंजूर कर दी….

- parole for child birth रबारियों की ढाणी भीलवाड़ा (Bhilwara) का नंदलाल (34) को एडीजे कोर्ट ने भीलवाड़ा (Bhilwara) ने 6 फरवरी, 19 को उम्रकैद की सजा से दंडित किया था, तब से वह अजमेर (Ajmer) की जेल में बंद है… 18 मई, 21 को उसे 20 दिन की पैरोल मिली थी… वह निर्धारित तिथि को लौट आया था… उसकी पत्नी ने अजमेर (Ajmer) कलेक्टर, जो कि पेरोल कमेटी के चेयरमैन भी है, उन्हें अर्जी दी… उसे शादी से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उसके कोई संतान नहीं है….

- parole for child birth इसलिए संतान उत्पति के लिए उसके पति को 15 दिन की पैरोल दी जाए…. कलेक्टर (Collector) ने अर्जी पर कोई कार्रवाई नहीं की तो नंदलाल की पत्नी हाईकोर्ट पहुंच गई और यही गुहार दुहराई…. कोर्ट ने दोनों पक्ष सुनने के बाद कहा कि यह विवाद नहीं है कि कैदी की शादी प्रार्थी के साथ हुई है…. वंश के संरक्षण के उद्देश्य से संतान होने को धार्मिक दर्शन, भारतीय संस्कृति और विभिन्न न्यायिक घोषणाओं के माध्यम से मान्यता दी गई है…

- parole for child birth कोर्ट ने कहा कि अगर हम मामले को धार्मिक पहलू से देखें; हिंदू दर्शन के अनुसार गर्भधान यानी गर्भ का धन प्राप्त करना 16 संस्कारों में से पहला है… विद्वानों ने ऋग्वेद के खंड 8.35.10 से 8.35.12 तक वैदिक भजनों के लिए गर्भधान संस्कार का पता लगाया है, जहां संतान और समृद्धि के लिए बार-बार प्रार्थना की जाती है…. इसलिए धार्मिक दर्शन, सांस्कृतिक, सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर विचार करते हुए कैदी की 15 दिन की पैरोल मंजूर की है….
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