Hardiwar Kumbh 2027 आयुक्त विनय शंकर पांडे से गंगा घाट पर कुम्भ वार्ता

Hardiwar Kumbh 2027  देवभूमि उत्तराखंड तैयार है भव्य और दिव्य कुंभ कराने के लिए , मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और उनका कहना है कि इस बार का जो कुंभ होगा, वह प्रयागराज कुंभ की ही तर्ज पर भव्य और दिव्य होगा। इसके लिए ब्यूरोक्रेसी, पूरा मेला प्रशासन जुट गया है। शाइनिंग समाचार के सम्पादक आशीष तिवारी ने हरिद्वार के गंगा घाट पर गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे से विशेष इंटरव्यू लिया जिसमें उन्होंने बताया कि भव्य और दिव्य कुंभ कराने के लिए हरिद्वार मेला प्रशासन के साथ-साथ पूरी सरकार गंभीरता से लगी हुई है। सरकार का लक्ष्य है कि चार धाम यात्रा के साथ-साथ कुंभ ऐतिहासिक हो, दिव्य और भव्य हो।

शाइनिंग समाचार के सम्पादक आशीष तिवारी के साथ CROSS TALK


आशीष तिवारी – ऋषिकेश और हरिद्वार में आपने कुम्भ पर बैठकें की और निर्देश दिए , अभी किस रोडमैप पर हम चल रहे हैं ?

विनय शंकर पांडे – हमारा लास्ट कुंभ दो हज़ार इक्कीस में आयोजित हुआ, लेकिन कोविड महामारी के कारण उसको बीच में ही समाप्त करने का निर्णय सरकार और संतों ने लिया था। जो उम्मीदें थी हमें उसको हम बिमारी के कारण भव्यता से नहीं मना पाए थे। मुख्यमंत्री जब प्रयागराज कुंभ गए थे, उन्होंने उसी समय घोषणा की थी कि दो हज़ार सत्ताईस में जो हमारा कुम्भ होने वाला है, उसको भव्य और दिव्य बनाएंगे जिसके लिए हम लोगों ने पिछले वर्ष से ही उसकी तैयारियां प्रारंभ कर दी थी। मुख्यमंत्री धामी स्वयं इस पूरे कुंभ को बहुत ही गंभीरता से और उसकी छोटी से छोटी तैयारियों पर अपना विस्तृत मार्गदर्शन दे रहे हैं। साथ ही साथ सभी विभागों का बेहतरीन तालमेल हो, सारे काम प्रार्थमिकता से समय से पूरा हो , संतों का, अखाड़ों का पूरा पार्टिसिपेशन हो इन सारे पहलुओं पर लगातार यह प्रयास चल रहा है । दो महीने पहले हमारे सभी अखाड़ों के साथ और हमारे आश्रमों के संत पूज्य सन्यासियों के संग बड़ी बैठक की थी और सभी अखाड़ों ने कहा कि दो हज़ार सत्ताईस में जो हमारा कुम्भ होगा उसमें अमृत स्नान करेंगे और कुंभ को भव्य और पवित्र स्वरुप बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।

आशीष तिवारी – क्राउड मैनेजमेंट बड़ा चैलेंज है। प्रयागराज का बड़ा क्षेत्र है और हरिद्वार में चुनौतियां बहुत हैं। इसको कैसे फोकस करेंगे?

विनय शंकर पांडे – पिछले वर्ष के सारे डेटा हमने देखे थे और कई स्नान होते हैं और आपको यह भी होगा कि हरिद्वार में तीन से साढ़े तीन महीने तक चलता है। 14 जनवरी के मकर संक्रांत से लेकर बैसाखी तक इसका पूरा एक लंबा समय होता है। मुख्य स्नान पर्वों पर यहां काफी बड़ी संख्या में लोग आते हैं और जिस तरह से प्रयागराज कुंभ में लोग आए, हमारी चार धाम यात्रा में या कांवड़ यात्रा में जो आ रहे हैं, उसको देखकर लगता है कि यह बहुत ही भव्य और दिव्य कुंभ के आयोजन में बड़ी संख्या में देश विदेश से लोग आएंगे। उसको लेकर हम लोगों ने कुछ बड़े कदम उठाए हैं। एक तो हमारे हरिद्वार की विशेषता यह है कि यहां के जो भी घाट हैं, वो सब पक्के घाट हैं और वो करीब उनकी संख्या सत्तर से पचहत्तर घाटों की है। इसके अतिरिक्त कुछ नए घाट भी बनाए जा रहे हैं और यह इसका करीब छह किलोमीटर में नए निर्माण हो रहे हैं। इसके अलावा हम लोगों ने पार्किंग को एक विशेष प्लानिंग की है। इसके तहत हम हरिद्वार सिटी में इंटर करने वाली जो भी मार्ग, चाहे आप चिड़ियापुर की तरफ से आएं, आप दिल्ली की तरफ से आएं, भगवानपुर की तरफ से आएं, देहरादून जो भी हमारे इनकी मार्ग की दस बारह किलोमीटर पीछे, हम लोग दस-दस से बीस हजार गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था कर रहे हैं। जहां पर गाड़ियां, बड़ी गाड़ियां पार्क होंगी, वहां पर लोगों के लिए सारी मूलभूत सुविधाएं होंगी। अच्छे स्वच्छ शौचालय, स्नानघर, उनके खाने पीने के लिए और वहां से यह प्लान किया गया है कि हर एक मिनट पर शटल सर्विसेज चली जो यात्रियों को लाए, यहां छोड़े, जो स्नान कर चुके हैं, उनको वापस ले और अगर हम लोग इस पूरी योजना में सफल हुए तो एक क्राउड का एक अच्छा मैनेजमेंट आपको देखने को मिलेगा। साथ ही साथ सिटी जो लोग रहते हैं ना, उनको भी जाम से निजात मिलेगी ।

 

आशीष तिवारी – हादसे न हों और कुम्भ की भीड़ को मैनेज किया जा सके , इसमें आपकी क्या तैयारी है ?

विनय शंकर पांडे – देखिए कोई आयोजन इस प्रकार का होता है चाहे अपने राज्य में या दूसरे राज्यों में , हम लोग उनके एक्सपीरियंस से काफी कुछ सीखते हैं और उसके अनुरूप यह देखने का जरूर प्रयास करते हैं कि कहां कोई कमी रह गई। क्योंकि हमेशा ऎसी घटना हमें कोई न कोई शिक्षा देकर जाती है। तो इन सबका पूरी बारीकी से हमारी पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन ने उसका पूरा अध्ययन किया है। क्या-क्या संभावित खतरे हो सकते हैं ? हमारा प्लान ए क्या होगा ? प्लान बी क्या होगा, प्लान सी क्या होगा। इन सारे पहलुओं पर उन्होंने काफी गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है और रेलवे भी स्पेशल ट्रेने चलाता है , हमारे आसपास के जो रेलवे स्टेशन हैं, वहां सुरक्षा के क्या मानक होंगे, कहां से एंट्री होगी, कहां से एग्जिट होगी, सारे पहलुओं पर हम लोग गंभीरता से काम कर रहे हैं ।


आशीष तिवारी – चार धाम के कपाट खुलने वाले हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या को लेकर क्या प्लान है ?

विनय शंकर पांडे – चार धाम यात्रा हमारी हर वर्ष होने वाली यात्रा है और लगभग पचास लाख से ज्यादा लोग चार धाम में आते हैं और कुंभ का एक अपना अलग ही महत्त्व है । जो भी सनातन में आस्था और विश्वास रखता है, जरूरी नहीं है कि वह अगर चार धाम में आ रहा है, कुंभ में नहीं आएगा, ऐसा नहीं है। वो लोग कुंभ में भी आते हैं, चार धाम में भी आते थे तो यह लोगों की अपनी आस्था और श्रद्धा पर निर्भर करना है और हम उम्मीद करते हैं दोनों यात्राओं के लोगों का बहुत अच्छी संख्या होगी

आशीष तिवारी – प्रधानमंत्री का उत्तराखंड से जुड़ाव है , हरिद्वार में कुंभ है तो उनका विशेष फोकस भी होगा तो क्या कोई दबाव भी है ?

विनय शंकर पांडे – देखिए प्रधानमंत्री का तो देवभूमि से विशेष लगाव है और उनका आशीर्वाद रहता है। आपको मैं बता दूं, इसी सप्ताह पांच सौ करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि कुंभ मेले को सफल बनाने के लिए मिली है जिसका एक एक पैसे का सदुपयोग निर्माण कार्यों , कुम्भ यात्रियों की सुविधा और सही काम में लगाया जायेगा। हरिद्वार आस्था का बड़ा केंद्र है तो हमें सभी बड़ों का सहयोग और आशीर्वाद भी मिलेगा।

आशीष तिवारी – आप भी गंगा में डुबकी लगाने की तैयारी कर रहे हैं ?

विनय शंकर पांडे – निश्चित रूप से … मैं भी कुम्भ स्नान करूँगा और पवित्र डुबकी लगाऊंगा और सभी लोगों को संदेश देना चाहूंगा कि मां गंगा की इस पवित्रता को स्वच्छ बनाए रखें और यह मानकर चलें कि एक अमृत धारा बह रही है। इसके अमृत जल का पान करें, पुण्य कमाएं और इसको प्रदूषित होने से बचाएं।