Pappu Yadav Controversial Statement बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) अपने एक बेहद आपत्तिजनक और विवादित बयान के कारण कानूनी और राजनीतिक मुश्किलों में घिर गए हैं. दरअसल लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण बिल) के गिर जाने के बाद एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने दावा किया कि देश की राजनीति में 90% महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए ‘समझौता’ करना पड़ता है.पप्पू यादव ने राजनीति के अपराधीकरण और नैतिक पतन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत में महिलाओं को देवी कहा जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि व्यवस्था और समाज उनके प्रति क्रूर है. कड़वी सच्चाई यह है कि 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर किसी प्रभावशाली नेता के बेडरूम से होकर शुरू होता है. बिना किसी समझौते के महिलाएं राजनीति में प्रवेश नहीं कर सकतीं.”
‘नेताओं के बेड से शुरू होता है महिलाओं का करियर ! Pappu Yadav Controversial Statement

सांसद ने केवल महिलाओं पर ही नहीं बल्कि पुरुष जनप्रतिनिधियों के चरित्र पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद और विधानसभाओं में बैठने वाले कई नेता अपने मोबाइल फोन पर अश्लील (Pornographic) सामग्री देखते हैं. उन्होंने मांग की कि सभी नेताओं के मोबाइल फोन की डिजिटल जांच होनी चाहिए ताकि उनका असली चेहरा जनता के सामने आ सके.
महिला आयोग ने अपनाया कड़ा रुख
बिहार राज्य महिला आयोग ने इस बयान पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सांसद पप्पू यादव को नोटिस जारी किया है. आयोग ने उनके बयान को अत्यंत अपमानजनक और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला करार दिया है. साथ ही बड़ी कार्रवाई करने के संकेत देते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से सिफारिश की है.

महिला आरक्षण बिल को बताया ‘दिखावा’
पप्पू यादव ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2026) के संशोधनों को राजनीतिक नाटक बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ओबीसी (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से कोटा क्यों नहीं दे रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ‘कोटा के भीतर कोटा’ के, इस कानून का लाभ केवल अमीर और रसूखदार परिवारों की महिलाओं को ही मिलेगा.

पलटवार कर भाजपा क्या बोली ?
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पप्पू यादव के बयान की निंदा करते हुए इसे “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि एक तरफ देश ‘नारी शक्ति’ का उत्सव मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष समर्थित सांसद महिलाओं के संघर्ष और उनकी क्षमता का अपमान कर रहे हैं. खबर मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है हम ऐसे बयान की निंदा करते हुए इसके सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं।

