Osho World Reality : ओशो की दुनिया आज भी जवान है

Osho World Reality रजनीश अपने पिछले जन्म में एक कठिन उपवास पर थे जिसमें तीन दिन ही शेष रह गए थे परंतु उनकी हत्या कर दी थी। अपने इस जन्म के पूर्व 700 वर्ष पूर्व ओशो मृत्यु से पूर्व इक्कीस दिन के उपवास की साधना कर रहे थे। पूरे इक्कीस दिन के उपवास के बाद शरीर छोडऩा था। इसके पीछे कुछ कारण थे, लेकिन इक्कीस दिन पूरे नहीं कर सके, तीन दिन बच गए। वे तीन दिन इस जीवन में पूरे करने पड़े, यह जीवन उसी जीवन के क्रम में है।



Osho World Reality ओशो ने कहानी, कविता और पत्रों के अलावा कभी कुछ भी नहीं लिखा। बाजार में जो भी किताबें उपलब्ध हैं वे सभी उनके कहे गए प्रवचनों को लिपिबद्ध करके जारी की गई है। अपना सारा ज्ञान रिकॉर्ड करवाया गया है। आप ओशो की जितनी भी किताबें देखते हैं, वे सब रिकॉर्डिंग ऑडियो के आधार पर लिखी गई हैं। ओशो कोई पारंपरिक संतों की तरह कोई रामायण या महाभारत आदि का पाठ नहीं कर रहे थे, न ही व्रत-पूजा या धार्मिक कर्मकांड करवाते थे। ना ही वे किसी भी प्रकार का चूरण बेच रहे थे। वह स्वर्ग-नर्क एवं अन्य अंधविश्वास से परे उन विषयों पर बोल रहे थे जिन पर इससे पहले किसी ने नहीं बोला था। उनका कहना था कि जीवन ही है प्रभु और ना खोजना कहीं।

Osho World Reality ओशो ने दुनियाभर के साहित्यकार, फिल्मकार, संगीतकार, धर्मगुरु, अभिनेता, राजनेता और दार्शनिकों को प्रभावित किया है परंतु इनमें से एक्का दुक्का ही जो इस बात को ईमानदारी से स्वीकार करते हैं। इन लोगों की लंबी लिस्ट है। ओशो के विचारों के कारण दुनिया के सभी क्षेत्रों में वैचारिक क्रांति देखने को मिलती है।

Osho World Reality साल 1981 से 1985 के बीच ओशो अमेरिका में रहे। यहां उनके शिष्यों ने ओरेगॉन राज्य में 64000 एकड़ जमीन खरीदकर उन्हें वहां रहने के लिए आमंत्रित किया। इस रेगिस्तानी जगह में ओशो कम्यून खूब फलने-फूलने लगा। यहां करीब 5000 लोग रह रहे थे। यहां महंगी घड़ियां, रोल्स रॉयस कारें, डिजाइनर कपड़ों की वजह से वे हमेशा चर्चा में रहे। ओरेगॉन में ओशो के शिष्यों ने उनके आश्रम को रजनीशपुरम नाम से एक शहर के तौर पर रजिस्टर्ड कराना चाहा लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और अंतत: रोनाल्ड रिगन सरकार ने ओशो के आश्रम को उजाड़ने का प्लान बनाया।

Osho World Reality अक्टूबर 1985 में अमेरिकी सरकार ने ओशो पर अप्रवास नियमों के उल्लंघन के तहत 35 आरोप लगाए और उन्हें हिरासत में भी ले लिया। उन्हें 4 लाख अमेरिकी डॉलर की पेनाल्टी भुगतनी पडी साथ ही साथ उन्हें देश छोड़ने और 5 साल तक वापस ना आने की भी सजा हुई। यहां तक तो ठीक था परंतु अमेरिकी सरकार ने ओशो को खत्म करने का पुरा प्लान तैयार किया था। कहा जाता है कि इसी दौरान उन्हें जेल में अधिकारियों ने थेलियम नामक धीमे असर वाला जहर दे दिया था। बाद में उन्हें देश निकाला दे दिया। ओशो कई यूरोपीय देशों में शरण लेने के लिए भटकते रहे परंतु अमेरिका के दबाव के चलते उन्हें कहीं भी शरण नहीं मिली यहां तक की भारत ने भी इस शर्त पर आने को कहा कि आपके सभी विदेशी शिष्य यहां नहीं आ सकते। तब कुछ समय के लिए ओशो को नेपाल ने शरण दी। अमेरिकी सरकार के दबाव की वजह से 21 देशों ने या तो उन्हें देश से निष्कासित किया या फिर देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इन देशों में ग्रीस, इटली, स्विटजरलैंड, स्वीडन, ग्रेट ब्रिटेन, पश्चिम जर्मनी, कनाडा और स्पेन प्रमुख थे।

Osho World Reality ओशो 1987 में पूना के अपने आश्रम में लौट आए। वह 10 अप्रैल 1989 तक 10,000 शिष्यों को प्रवचन देते रहे। कहा जाता है कि अमेरिका के द्वारा दिए गए जहर का असर यूं तो 6 माह में ही दिखाई देने लगा था परंतु ओशो ने अपने शरीर को लगभग 5 वर्ष तक जिंदा रखा। इस दौरान वे बहुत ही कमजोर हो गए थे। उनके सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। 19 जनवरी, वर्ष 1990 में ओशो रजनीश ने हार्ट अटैक की वजह से अपनी अंतिम सांस ली। कहा जाता है कि अमेरिकी जेल में रहते हुए उन्हें थैलिसियम का इंजेक्शन दिया गया और उन्हें रेडियोधर्मी तरंगों से लैस चटाई पर सुलाया गया जिसकी वजह से धीरे-धीरे ही सही वे मृत्यु के नजदीक जाते रहे।


