Bear Terror भालू के खौफ में उत्तराखंड के स्कूली बच्चे !

Bear Terror पहाड़ों में मुसीबतें कब कहाँ से सामने आ जाएं कहना मुश्किल है। कभी कुदरत का कहर तो कभी संसाधनों की कमी और अक्सर जंगली जानवरों का खौफ और उनके जानलेवा हमले बड़ा नुक्सान कर रहे हैं लेकिन सरकारी सिस्टम लकीर पीटते रह जाते हैं। डांगी गांव में स्कूल जा रहे बच्चों के रास्ते में अचानक भालू आ धमका, जिसके डर से बच्चे गांव की ओर वापस भागे। जबकि बच्चों के साथ स्कूल का चतुर्थ श्रेणी कर्मी भी था। इसके बाद ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल छोड़ा। जिससे डरे सहमे बच्चें वापस घर की ओर आने लगे। बच्चों के साथ जा रहे स्कूल के चतुर्थ श्रेणी कर्मी ने ग्रामीणों को फोन पर भालू के होने की सूचना दी। जिसके बाद ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल छोड़ा।

मोरी में तोड़े कई घरों और छानियों के दरवाजे Bear Terror

 

भालू का व्यवहार बेहद आक्रामक
जयहरीखाल ब्लॉक के अंतर्गत दुधारखाल क्षेत्र में इन दिनों भालू का आंतक बना हुआ है, जिससे क्षेत्र में लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाने व पिंजरा लगाने की मांग की है। ग्रामीण ने बताया कि उन्हें आए दिन भालू क्षेत्र में घूमते हुए दिखाई दे रहा है। बताया कि दुधारखाल में सवेरे की सैर को निकले एक शिक्षक पर भालू ने हमले का प्रयास किया। शिक्षक ने मौके से भाग खुद की जान बचाई। उधर, कोटा मल्ला में एक पेड़ पर ग्रामीणों को पांच भालू एक साथ नजर आए। क्षेत्री जन की माने तो भालू चार-पांच के झूंड में क्षेत्र में घूम रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने किसी अनहोनी से पूर्व ही भालूओं को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग वन महकमे से की है।

 

लोग बच्चों को अकेले भेजने से डर रहे हैं

कमस्यार घाटी के टकनार और भैसूड़ी गांवों में पिछले एक सप्ताह से भालू की बढ़ती सक्रियता ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। सबसे अधिक प्रभावित छात्र हैं, जो भालू के खौफ के बीच वन विभाग की सुरक्षा में स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की शिकायत के बाद वन विभाग की टीम गांवों में पहुंची और हालात का जायजा लेकर गश्त बढ़ा दी है। भैसूड़ी के ग्राम प्रधान ने बताया कि भालू अपने दो शावकों के साथ करीब दस दिन पहले क्षेत्र में घुस आया था। रात के समय गांव में उसकी आवाजें साफ सुनाई देती हैं, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। दिनभर भी जंगलों में भालू की हरकतें देखी और सुनी जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चे खतरे में हैं, खासकर वे लड़कियां जो सात किलोमीटर दूर राइंका देवतोली पढ़ने जाती हैं।

 

बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित
ज्ञात हो कि पहले भी कई बार स्कूली बच्चों को गुलदार और भालू मिल चुका है। जिसके चलते बच्चों के अभिभावकों ने उच्च अधिकारियों से कुछ समय के लिए विद्यालय को गांव स्थित खाली पढ़ी प्राइमरी स्कूल में संचालन करने की मांग की थी, ताकि अभिभावक अपने बच्चों को जंगली जानवरों से सुरक्षित महसूस कर सके। हालांकि राजकीय उच्चतर माध्यम विद्यालय डांगी में मात्र 6 बच्चे ही पढ़ते है। जिसमें 3 बच्चे थनूल गांव के और 3 बच्चे डांगी गांव के है। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित है। प्रभारी प्रधानाचार्य नीलम रावत ने बताया कि प्राइमरी विद्यालय संचालित करने लायक नहीं है। जंगली जानवरों से सुरक्षा को लेकर शनिवार को उन्होंने अभिभावकों की एक आपात बैठक बुलाई है। वहीं खंड शिक्षा अधिकारी कल्जीखाल संजय कुमार ने बताया कि वह स्वयं प्राइमरी विद्यालय का औचक निरीक्षण करेंगे की भवन विद्यालय संचालित करने लायक है या नहीं उसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा।

भालू के हमले से ग्रामीणों में दहशत

अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है और लोग बच्चों को अकेले भेजने से डर रहे हैं। इधर, सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भैसूड़ी और टकनार गांव पहुंची। टीम ने गांवों में नियमित गश्त शुरू कर दी है और स्कूल में जाकर शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों से बातचीत की। बच्चों को समूह में चलने, आवाज करते हुए रास्ता तय करने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अभिभावकों को भी रात के समय अकेले घर से बाहर न निकलने को कहा गया …