Special Story By : Anita tiwari , Dehardun

BTC Chaiwali Srishti Verma चायवाला … एक ऐसा शब्द है जिसकी चर्चा बीते कुछ सालों में दुनियाभर में गूंजती रहती है। हिन्दुस्तान की सियासत में तो चायवाले का ज़िक्र करते ही मन में एक व्यक्ति विशेष की इमेज भी नज़र आ जाएगी। लेकिन हम आज आपको एक चाय वाली की कहानी बता रहे ज़िक्र आज यूपी से लेकर दिल्ली तक हो रहा है। पढ़िए नवाबों के शहर लखनऊ की बीटीसी चायवाली सृष्टि वर्मा की जुबानी उन्हीं की कहानी –
BTC Chaiwali Srishti Verma बीटीसी चायवाली लखनवी लड़की सृष्टि की कहानी

- BTC Chaiwali Srishti Verma लखनऊ की बीटीसी चायवाली सृष्टि वर्मा से जब मीडिया सवाल करता है तो वो बड़े आत्मविश्वास से कहती हैं कि आज मुझे सभी लोग बीटीसी चायवाली के नाम से जानते हैं। चाय बेचती हूं। कुछ लोग सराहना करते हैं तो कुछ लोग ताने भी देते हैं। बीएससी किया है। बीटीसी और बीएड भी, फिर इसकी जरूरत क्या है। मैं कहती हूं, यह लोगों ने भ्रम बना रखा है कि ये लड़कों का काम है, ये लड़कियों का। जेंडर वाइज वर्क होता ही नहीं। जो काम लड़के कर सकते हैं लड़कियां भी बखूबी कर सकती हैं।
पार्ट टाइम जॉब्स तो पहले से कर रही थी
- BTC Chaiwali Srishti Verma लखनऊ के अलीगंज की रहनेवाली सृष्टि वर्मा कहती हैं ग्रेजुएशन के दौरान ही मैंने पार्ट टाइम जॉब्स करना शुरू कर दिया था। 2014 में ग्रेजुएशन पूरा किया। उस समय रेस्टोरेंट में काम किया। अपने ही फ्रेंड के रेस्टोरेंट को व्यवस्थित करने में मदद की। कोचिंग में पढ़ाया, घर पर भी बच्चों को ट्यूशन दिया।

BTC Chaiwali Srishti Verma अप्रैल में स्टॉल की हुई शुरुआत
- फिर मैंने सोचा कि खुद का अपना कुछ करना है। कुछ ऐसा जिसमें इंवेस्टमेंट कम हो, साथ ही स्ट्रेस न हो। पहले कपड़े के बिजनेस में उतरना चाहती थी। लेकिन फिर इस आइडिया को ड्रॉप कर दिया। इसके बाद चाय के बिजनेस पर ध्यान गया। यहां लखनऊ में पहले इतने फास्ट फूड काउंटर नहीं होते थे। वहीं रेस्टोरेंट में ओपन एरिया नहीं होते। लोग अपने आसपास हो रही चीजों के बारे में जानना चाहते हैं। तब मैंने तय किया कि चाय का स्टॉल लगाऊंगी। इसी साल अप्रैल में इसकी शुरुआत की।
अच्छे रिस्पांस से हौसला बढ़ा
- BTC Chaiwali Srishti Verma आज ढाई महीने हो चुके हैं। लोगों का रिस्पांस अच्छा रहा है। युवा से लेकर बुजुर्ग तक स्टॉल पर आते हैं। मेरे इस काम की प्रशंसा करते हैं। वहीं मेरे दोस्तों अमन, अर्पिता, शोभित ने मेरे इस काम में काफी मदद की। वो हमेशा उत्साह बढ़ाते हैं। लोग कहते हैं कि लड़के इसके दोस्त हैं। इसका चक्कर चल रहा है। लेकिन मुझे इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। ये लोगों का नजरिया है। लोग अपने घरों के भीतर झांक कर नहीं देखते। मैं अपने काम के प्रति फोकस्ड हूं।

सुनना नहीं चाहते तब तो जरूर सुनाऊंगी
- BTC Chaiwali Srishti Verma बाइक चलाती हूं। स्कूल के दिनों से ही वॉलीबॉल खेलती हूं। बहस करती हूं। अपनी बात रखती हूं। अगर मेरी बात नहीं सुनना चाहते तब तो जरूर सुनाऊंगी। आज लखनऊ की बीटीसी चायवाली सृष्टि वर्मा लोगों के बीच एक मिसाल बन रही हैं , लाखों लड़कियों के लिए हौसले की कहानी है जिनके हिम्मत और बोल्ड इरादों ने एक नयी राह खोल दी है।
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