Purush Aayog ‘पुरुष सिर्फ स्पर्म डोनर, पैसे कमाने की मशीन, झूठे आरोप में फंसाने का खिलौना नहीं है बल्कि वह भी किसी का पिता, पति और भाई हैं। मैंने मर्दों के दुख को समझा और पुरुष आयोग बनाया।’ ये शब्द हैं दिल्ली में रहने वाली बरखा त्रेहन के। इलाहाबाद में पली-बढ़ी बरखा मीडिया के साथ खास बातचीत में कहती हैं, ‘मैं बचपन से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाली बच्ची रही। दिल्ली में शादी होने से पहले भी मैं स्कूल में पढ़ाती थी। मेरा एक्टिविज्म अब से नहीं बल्कि बचपन से ही शुरू हो गया था।
Purush Aayog दोस्त की पीड़ा से निकला आइडिया

- पुरुषों के लिए काम करने की मैंने तब सोची जब मेरा सबसे अजीज दोस्त झूठे रेप के केस के चक्कर में खुद की जान लेने जा रहा था। उसकी जिदंगी सिर्फ घुप अंधेरे में कमरे में सिमट गई थी। जब मुझे यह मालूम हुआ कि उसके ऊपर रेप का झूठा आरोप लगा तो मुझे लगा कि कोई लड़की रेप का आरोप क्यों लगाएगी, लेकिन मामले की तह में गई तो सच में मामला झूठा ही निकला। बस तभी से मैंने तय कर लिया अब पुरुषों के लिए ही काम करना है।
Purush Aayog पुरुषों के लिए नहीं कोई आयोग

Purush Aayog आज हिंदुस्तान में कीड़ों-मकोड़े, जानवरों, पेड़-पौधे सभी के लिए मंत्रालय है, लेकिन पुरुषों के लिए कोई मंत्रालय नहीं है। ऐसा लगता है कि पुरुष नाम का प्राणी इस देश में एग्जिस्ट ही नहीं करता। सरकारों के लिए पुुरष एक भूला हुआ जेंडर हो गया है। महिलाओं से ज्यादा सुसाइड पुरुष करते हैं, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता।
मैंने तमाम सरकारों से अपील की, लेकिन किसी ने मेरी बातों पर गौर नहीं किया। दोस्त को उबारते-उबारते मैं लोगों की नजर में आ गई और अब मेरे पास सताए़, रेप हुए और झूठे आरोपों में फंसे मर्दों की झड़ी लग गई।
Purush Aayog चार साल पहले शुरू की पुरुषों पर बात

- चार साल पहले मैंने पुरुष आयोग बनाया और तबसे ऐसे-ऐसे केस सामने आ चुके हैं कि उन्हें सुनकर मेरा कलेजा मुंह को आ जाता है। एक किस्सा जो मुझे याद आ रहा है उसमें सोनीपत के एक ही परिवार के तीन लोग जिसमें माता-पिता और बेटा शामिल हैं, ने कीटनाशक खाकर अपनी जान ले ली। उनकी बहू उन्हें इस कदर प्रताड़ित करती थी कि तीनों ने परेशान होकर मरने का रास्ता चुना। जब मैंने इस मामले में टांग अड़ाई तो बहू की गिरफ्तारी हुई।
Purush Aayog मिलती हैं रोज रेप की धमकियां – बरखा

Purush Aayog दोस्त की पीड़ा से निकला आइडिया - Purush Aayog इन सभी केसेज को सॉल्व करना इतना आसान नहीं था। मुझे कई बार रे और जान से मारने की धमकी मिली हैं। यहां तक कि मैं जिन नेताओं के सामने अपनी बात रखती और उनके साथ अपने फोटोज शेयर करती तो लोग मुझे कहते कि मैं इन नेताओं के साथ सो चुकी हूं। रोजमर्रा की धमकियों और ट्रोलिंग से मैं डरती नहीं हूं। बचपन से फाइटर रही हूं। मैं चेंजमेकर हूं। मेरी मांग है कि एक पुरुष कमीशन बनना चाहिए और सभी जेंडर के लिए समान कानून बनने चाहिए। हमें सिर्फ ‘मन की बात’ नहीं ‘मैन की बात’ करनी होगी।
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