Child Birth Rate 20-22 पहले रफ़्तार पर ब्रेक लगी और अब तेज़ हो गयी स्पीड , जी हाँ देश भर में बच्चों के जन्म लेने का कुछ ऐसा ही ग्राफ बीते कोरोना काल से अब तक दिखाई दे रहा है। आपको जानकर हैरानी भी होगी और सुकून भी मिलेगा कि बीते कुछ साल में देश में गर्भाधान की रफ़्तार थमी है जिसकी बड़ी वजह बनी है कोरोना की आंधी और लॉकडाउन
Child Birth Rate 20-22 कोरोना काल में घटी प्रेग्नेंसी की रफ़्तार फिर बढ़ी

- Child Birth Rate 20-22 कोरोना की जानलेवा पहली-दूसरी लहर को कोई नहीं भूल पाएगा। इस दौरान कई राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में बच्चों की जन्मदर घट गई। कोरोना से पहले की तुलना में पैदा हुए बच्चों की संख्या में कमी आई है। कोरोना की दोनों लहरों के बीच करीब डेढ़ लाख बच्चे कम पैदा हुए। कारण कोरोना की दहशत, अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और बढ़ती बेरोजगारी रही। ये खुलासा पिछले चार-पांच साल से किए गए मध्यप्रदेश के नेशनल हेल्थ मिशन की रिपोर्ट में हुआ है।

केस 1- शादी के 3 साल बाद प्लान किया, फिर कोरोना में कैंसिल किया
Child Birth Rate 20-22 रायसेन की रहने वाली 28 साल की युवती की शादी 2017 में हुई थी। दंपती ने तीन साल बाद बेबी प्लान करने का सोचा। इसी दौरान कोरोना आ गया। मार्च-अप्रैल में लॉकडाउन लगा। इसके बाद बच्चे की प्लानिंग आगे बढ़ा दी। सितंबर-अक्टूबर 2020 में पहली लहर के दौरान मामले बढ़े तो वे डरे। रिस्क नहीं लेना चाहते थे। जानते थे कि प्रेग्नेंसी के बाद रुटीन चेकअप के लिए भी जाना होगा। कोरोना को देखते हुए ये संभव नहीं था। 2021 में अप्रैल-मई में दूसरी लहर आई, तो वे और डर गए। लिहाजा, फिर टाल दिया। अब शादी के 5 साल बाद आखिरकार बेबी प्लान किया है।

केस 2- कोरोना में शादी हुई, तीन साल टाली फैमिली प्लानिंग
- Child Birth Rate 20-22 होशंगाबाद की रहने वाली युवती की शादी पहली लहर में टल गई। आखिरकार दूसरी लहर के दौरान जैसे-तैसे शादी हुई। फिर बात आई फैमिली प्लानिंग की, तो कोरोना के कारण टाल दिया। पति ने भी स्थिति को देखते हुए मना कर दिया। तीसरी लहर के बाद अब चौथी लहर की भी आहट है। कोरोना के डर के कारण अब फिर उन्होंने फैमिली प्लानिंग को अगले साल के लिए टाल दिया है।

- Child Birth Rate 20-22 डॉक्टर्स मानते है कि जैंसे जैसे कोरोना की रफ़्तार घटी है देश में महिलाओं के प्रेग्नेंट होनी की बढ़ी है। चिकित्सक बताते हैं कि कोरोना के दौरान अस्पताल और डॉक्टरों से लोग बचना चाहते थे लिहाज़ा महिलाएं भी प्रेग्नेंसी धारण नहीं कर रही थी। लेकिन जैसे जैसे वैक्सीनेशन बढ़ी है लोगों में डर खत्म हुआ है और अब गर्भधारण की रफ़्तार फिर से रफ़्तार पकड़ती नज़र आ रही है।
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