Garbh Sanskar हमारे देश में गौर कीजियेगा तो एहसास होगा कि कुछ साल पहले पेरेंट्स बोलते थे कि मेरे बच्चे को ‘आईआईटियन’ बना दो। लेकिन अब दंपती कहते हैं कि बेटा ‘आईआईटियन’ बने या न बने, वो बुरी चीजों से दूर रहे। बस सही राह पर चले और माता-पिता की सेवा करे। लोग पुराने मूल्यों की तरफ लौट रहे हैं। आजकल के पेरेंट्स संस्कारी बच्चा चाहते हैं।
Garbh Sanskar गर्भ में भ्रूण करता है जीवन की तैयारी

- Garbh Sanskar हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक शाखा ‘संवर्धिनी न्यास’ ने बच्चों को मां के गर्भ में ही संस्कार देने के लिए ‘गर्भ संस्कार’ अभियान शुरू किया है। इसमें गर्भवती महिलाओं को गीता, रामायण, शिवाजी महाराज और स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और संघर्ष के बारे में जानकारी देने की बात कही गई है। तो चलिए आपको बताते हैं नौ महीने गर्भ में कैसा होता है भ्रूंण से शिशु बनने सफर

- Garbh Sanskar ब्रिटेन की वेबसाइट ‘बेबी सेंटर’ पर पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक, मां का गर्भ बच्चे के लिए सेंसरी प्लेग्राउंड है। 10 हफ्ते का होते ही गर्भ में बच्चा हिलने-डुलने लगता है और अपने नन्हे हाथ-पैरों से अंगड़ाई भी लेता है। 23 हफ्ते का होते ही वह मां की और दूसरी आवाजों पर ध्यान देना शुरू करता है। यहां तक कि मां जो खाना खाती है, उसका स्वाद भी लेता है।

Garbh Sanskar आखिरी के 10 हफ्तों में मां की हर बात सुनता है बच्चा
- पैसिफिक लूथरन यूनिवर्सिटी, वॉशिंगटन की एक स्टडी कहती है कि आखिरी के 10 हफ्तों में बच्चा मांं की हर बात सुन सकता है। बच्चा इस समय मां की हर बात ध्यान से सुनता है। क्योंकि, गर्भ में बच्चे के 30 हफ्ते में ही सेंसरी ऑर्गन (ज्ञानेन्द्रियां) पूरी तरह विकसित हो जाते हैं और सुनने के लिए ब्रेन भी काम करने लगता है।

Garbh Sanskar गर्भ में बच्चा शब्द नहीं, पर आवाज की लय और पैटर्न समझने लगता है
- स्टडी में यह भी कहा गया है कि गर्भ में पल रहा बच्चा शब्दों को तो नहीं समझ सकता, मगर आवाज की लय और उसके पैटर्न को जरूर समझता है।खास बात यह है कि गर्भ में बच्चा भाषाओं में फर्क करना भी जान जाता है। वह मां की मातृभाषा और बाहरी भाषा में इसी लय और पैटर्न के आधार पर आसानी से अंतर कर पाता है।

Garbh Sanskar गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए पहली टीचर है मां
- मां गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए टीचर है। अगर मां दो भाषाओं की जानकार है तो बच्चे में भी दोनों भाषाओं की समझ उसके ब्रेन के विकास के साथ पनपने लगती है। जन्म के बाद बच्चा उन भाषाओं को सीखने में ज्यादा सहज हो पाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में इंस्टीट्यूट फॉर लर्निंग एंड ब्रेन साइंसेज की सह लेखक पैट्रिशिया कुहल कहती हैं कि मां गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग को प्रभावित करती है। वह जो भी बोलती है, उसका असर भ्रूण के मस्तिष्क पर पड़ता है।

कानों में भरा होता है फ्लूइड, जिससे सुन पाने में सक्षम
- Garbh Sanskar अमेरिका की पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी के प्रोफेसर रिक गिलमोर कहते हैं कि बच्चा गर्भ में मां की बॉडी से बाहरी दुनिया की सूचनाएं लेता रहता है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना की एक स्टडी में कहा गया है कि गर्भकाल के 16 हफ्ते में विकसित हो रहा भ्रूण बाहरी दुनिया की आवाजों को ग्रहण करना शुरू कर देता है। उसके कान एम्ब्रियाॅनिक फ्लूइड से भरे होते हैं, जिससे आवाजें टकराती हैं, वहीं एब्डॉमिनल टिश्यूज ऑडिबल मशीन का काम करते हैं, जिससे बच्चा हल्की आवाजें सुन पाता है।
खुशबू चौधरी जैसी गलती न करिए ! लुट जायेंगे https://shininguttarakhandnews.com/online-froud-alert/

