IAS Grandparents Suicide : IAS के दादा-दादी का सुसाइड नोट पढ़कर रो देंगे 1 Truth

IAS Grandparents Suicide समाज आपसे और हमसे मिलकर ही बनता है। परिवार और रिश्ते भी हम इसी समाज में बनाते हैं। सस्कार , परम्परा और सौहार्द इन रिश्तों को मजबूत बनाता है लेकिन आज जिस खबर को आप पढ़ने जा रहे हैं वो रिश्तों की सबसे शर्मनाक कड़वाहट का उदाहरण है जो सोचने पर आपको भी मज़बूर कर देगा…

IAS Grandparents Suicide  रोटी नहीं मिली तो खाया जहर

IAS Grandparents Suicide
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IAS Grandparents Suicide ज़रा सोचिये कि जिस शख्स के बेटे के पास 30 करोड़ संपत्ति हो, पोता आईएएस हो, लेकिन उसे रोटी नसीब नहीं हुई। हाल ये हुआ कि पति-पत्नी ने तंग आकर जहर खा लिया। घटना हरियाणा के चरखी दादरी की है। जहर खाने से पहले ही इस दंपत्ति ने सुसाइड नोट भी लिखा था। जिसमें उन्होंने ऐसी-ऐसी बातें लिखीं हैं कि जिसे आप पढ़कर रो देंगे। इस दंपत्ति को एक बहू ने घर से निकाल दिया तो दूसरी बासी रोटी खिलाती थी। जिसके बाद इन्होंने जहर खा लिया।

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IAS Grandparents Suicide हरियाणा में एक बुजुर्ग दंपति ने 29 मार्च की रात सल्फास की गोलियां खाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने परिवार के सदस्यों पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए एक सुसाइड नोट भी पुलिस के पास छोड़ा है। दंपति ने कहा कि उनके बेटे के पास 30 करोड़ रुपये की संपत्ति है लेकिन उन्होंने उन्हें कोई खाने के लिए रोटी नहीं देता है।जगदीश चंद्र आर्य (78) और भागली देवी (77) ने चरखी दादरी के बड़हरा की शिव कॉलोनी स्थित अपने घर में ही जहर खाया और उसके पास पुलिस को भी खुद ही सूचना दी।

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सुसाइड नोट में क्या लिखा

IAS Grandparents Suicide जहर खाने से पहले ही इस दंपत्ति ने सुसाइड नोट भी लिखा था। जिसमें उन्होंने ऐसी-ऐसी बातें लिखीं हैं कि जिसे आप पढ़कर रो देंगे। सुसाइड नोट में आर्य ने कहा किवो लोग अपने दूसरे बेटे महेंद्र के साथ बाधरा में रहते थे, लेकिन जब छह साल पहले उनके बेटे की मृत्यु हो गई, तो वे अपनी बहू नीलम के साथ रहने लगे। आर्य ने आरोप लगाया कि बाद में उसने उन्हें बाहर निकाल दिया, जिसके बाद उन्हें दो साल के लिए वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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IAS Grandparents Suicide अनाथ आश्रम के जब ये दंपति लौटे तो घर पर ताला लगा दिया। उन्होंने लिखा- “मेरी पत्नी को लकवा मार गया और हम दूसरे बेटे वीरेंद्र के साथ रहने लगे, लेकिन वो हमें बासी खाना खिलाने लगा। बासी रोटी देती था।” जिसके बाद जगदीश चंद्र आर्य और भागली देवी ने अपने ही परिवार के व्यवहार से तंग आकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने का फैसला किया। आर्य ने अपने बेटे वीरेंद्र और दो बहुओं को अपनी मौत का कारण बताया है। अब ज़रा सोचिये कि रिश्तों की अहमियत पर ये पैसा कितना बड़ा ख़तरा बन चुका है ,

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