Jan Vishwas Bill 2026 देश की संसद में पास हो गया है. गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद यह बिल कानूनी रूप ले लेगा. इस विधेयक के तहत लगभग 717 छोटे अपराधों को अपराध से बाहर कर दिया गया है. मतलब इन अपराधों के लिए अब जेल की सजा नहीं दी जाएगी. जुर्माना या चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे आम आदमी को बड़ी राहत मिलेगी. साथ ही न्याय व्यवस्था पर भी केसों का अनावश्यक दबाव कम होगा.
छोटे अपराधों में जुर्माने से निपटारा Jan Vishwas Bill 2026

जन विश्वास बिल के जरिए 79 केंद्रीय कानूनों में संशोधन किया गया है. जिनमें मोटर वाहन अधिनियम, बैंकिंग, बीमा, पेटेंट, बिजली से जुड़े अपराध, रेलवे, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, चक्का जाम, नई दिल्ली नगरपालिका अधिनियम और दवाओं से संबंधित कानून शामिल हैं. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि इन सेक्टर से जुड़ी छोटी-छोटी गलतियों के लिए कानून सजा दी जाती थी, जिससे आम आदमी पर बुरा असर पड़ता था. लेकिन अब इस बिल के कानून बन जाने के बाद जुर्माना या चेतावनी देकर छोड़ा जा सकेगा.

ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता
ड्राइविंग लाइसेंस (DL) की वैधता अवधि समाप्त होने के बाद उसे रिन्यू नहीं कराने को अपराध माना जाता था. इसके लिए 5,000 रुपये से लेकर 3 महीने तक की जेल का प्रावधान था, लेकिन अब जन विश्वास बिल में DL की वैधता अवधि समाप्त होने के बाद 30 दिन तक वैलिड माना जाएगा.
राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम
राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत राजमार्ग को जाम करना या आवागमन में असुरक्षित स्थिति उत्पन्न को लेकर 5 साल की जेल या जुर्माना के प्रावधान था, लेकिन इस बिल में इसे खत्म कर दिया गया है. अब राजमार्ग जाम करने पर सिर्फ जुर्माना भरना पड़ेगा

जन्म-मृत्यु सूचना न देने पर जुर्माना
जन्म हो या मृत्यु इसकी सूचना सरकार देनी पड़ती है. ऐसा नहीं करना मौजूदा समय में कानूनी अपराध है. देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 जन्म-मृत्यु की सूचना नहीं देने पर जेल की सजा का प्रावधान है, लेकिन नए बिल में अब इसे अपराध से बाहर कर दिया है. इसी तरह कैटल ट्रेसपास एक्ट, 1971 के तहत सजा के प्रावधान को नागरिक दंड यानी जुर्माने में बदल दिया है.
बिजली से जुड़े अपराधों में भी बदलाव
बिजली अधिनियम, 2003 के तहत विभाग के आदेश-निर्देशों का पालन नहीं करना मौजूदा समय में अपराध माना जाता है. इसके लिए 3 महीने की जेल या जुर्माना या दोनों सजाएं हैं. जन विश्वास बिल के कानून बन जाने से उसमें सजा का प्रावधान खत्म हो जाएगा. सिर्फ जुर्माना भरना पड़ेगा.

