Missing Politician उत्तराखंड के एक दिग्गज नेता बीते कई महीनों से लापता है ! जी हां सही पढ़ा आपने लापता है । क्योंकि ना मीडिया में दिखते हैं, न सोशल मीडिया में नज़र आते हैं। वो पार्टी के कार्यक्रमों में भी नजर नही आते हैं। ना कैमरों के सामने बयान देते दिखते हैं , लिहाजा कहा जा सकता है कि वह पूरी तरह से इस वक्त लापता है।
Missing Politician हरिद्वार या पौड़ी गढ़वाल से होगी वापसी ?

- Missing Politician आप इसके पहले कि यह पूछे वह आखिर नेता कौन है? तो हम आपको बता दें कि उत्तराखंड में शेर ए गढ़वाल कहा जाता है। यह इशारा बहुत है उस नेता के नाम को बताने के लिए , क्योंकि कभी मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार बताए जाने वाले इस दिग्गज नेता को उत्तराखंड में सबसे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री होने का भी दर्जा हासिल है। सबसे कम उम्र में राजनीति शुरू कर कैबिनेट मंत्री बनने वाले इस दिग्गज नेता ने कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस में रहते हुए कई अहम विभागों का जिम्मा संभाला, लेकिन उतना ही यह सुर्खियों में भी रहे हैं चर्चित रहे हैं और अपने बयानों से हमेशा नए-नए समीकरण भी बनाते रहे हैं।

- Missing Politician फिलहाल अंतिम खबर मिलने तक ये कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे हैं। लेकिन इसके पहले भाजपा सरकार में भी प्रभावशाली और कद्दावर मंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं। अदावत और सियासत में पहलवानी दांवपेच लगाने के माहिर माने जाने वाले यह दिग्गज पिछले कई महीनों से क्या कर रहे हैं और किस योजना का ब्लू प्रिंट तैयार करते हुए भूमिगत हैं कोई नहीं जानता है। न पार्टी दफ्तर न पार्टी के कार्यक्रमों और पार्टी के पक्ष में किसी तरह के बयानों में दिखते हैं । तो क्या यह माना जाए कि माननीय किसी बड़े एजेंडे पर जुटे हुए हैं ।

- Missing Politician कभी दिग्गज हरीश रावत के साथ उनकी अदावत अखबारों में खूब मसाला बनती थी। लेकिन अचानक उन्होंने हरदा के ही नेतृत्व में 2022 चुनाव से पहले कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया । लेकिन उन्हें झटका तब लगा जब कांग्रेस ने उनकी बहू अनुकृति गुसाईं को तो टिकट थमा दिया लेकिन हरक के हाथ खाली रहे। हरक की राजनीति को करीब से समझने वाले कह रहे हैं कि फिलहाल शेर ए गढ़वाल किसी बड़े दांव के लिए वर्जिश में जुटे हैं, और बहुत संभव है कि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले वह कोई ऊंची उड़ान भर लें। अब यह उड़ान भाजपा के पाले में रहते हुए नजर आएगी या कांग्रेस ही उन्हें सियासी ऑक्सीजन देगी यह तो वक्त बताएगा । लेकिन बीते दिनों जिस तरह से हरिद्वार में हरक के लोकसभा चुनाव लड़ने के बयान ने फिर सुर्खियों को जन्म दिया उसके बाद एक लंबी खामोशी छा गई।

- Missing Politician पार्टी के अंदर भी हरक को लेकर बहुत उत्साह नजर नहीं आता । मीडिया भी अब जैसे डॉ हरक सिंह रावत प्रकरण को किनारे रख चुकी है और भाजपा के तो कहने ही क्या, क्योंकि उसे पता है कि जब से पार्टी ने उन्हें निकाला है तो हरक भी डिफेंसिव मोड में है । क्योंकि पिछले दरवाजे से वह लगातार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दस्तक भी दे रहे हैं ।यानी पार्टी के कुछ नेता कहते हैं कि हरक 2024 में अगर भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ने उतरे तो कोई हैरानी नहीं होगी क्योंकि कांग्रेस में जाकर भी उन्होंने वह आक्रामकता नहीं दिखाई जिसकी एक बागी नेता से उम्मीद की जाती है।

Missing Politician खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए उन्होंने कभी कोई टिप्पणी विवादित या आपत्तिजनक नहीं की है। यानी यह डॉ हरक सिंह रावत की सॉफ्ट पॉलिटिक्स है जिसमें वह कहीं भी रहते हुए अपने प्रभाव को कम करना नहीं चाहते । पार्टी कोई भी हो लेकिन उनके दबदबे में कोई कमी ना हो , यह संभवत उनकी टॉप प्रवृत्ति में शामिल है। जिस तरह बीते कुछ महीनों से वह बनवास गुजार रहे हैं उससे मीडिया के अंदर भी यही कानाफूसी है कि वह लोकसभा चुनाव का इंतजार कर रहे हैं और अपने नफे और नुकसान के तराजू में जिस लोकसभा सीट पर वह नजर रखेंगे और जो पार्टी उन्हें टिकट थमा आएगी आखिर में वह उसी के हो जाएंगे। क्योंकि सियासत में ना कोई स्थाई दोस्त होता है और ना ही दुश्मन, और यही तो है डॉ हरक सिंह रावत की पहाड़ पॉलिटिक्स का सुपरहिट फार्मूला
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