No Electricity Village : आज भी चिमनी व मशाल की रोशनी में होती है शादी , 1 Black Truth

No Electricity Village अगर आपको लगता है कि डिजिटल इंडिया में सबके दिन अच्छे आ गए हैं तो आप यकीनन गलत सोच रहे हैं। देश के कई इलाके ऐसे है जहाँ पानी बिजली और साधन आज भी दूर की कौड़ी बने हुए हैं। भाजपा सरकार में ये उस राज्य की कड़वी सच्चाई है जहाँ मामा जी की सरकार है और यहाँ आज भी गेहूं पिसवाने 6 किमी की दौड़ लगनी पड़ती है और लालटेन चिमनी की लड़खड़ाती मध्यम रौशनी में लोग शादी ब्याह करने को मजबूर हैं।

No Electricity Village सात दशक से बिजली नहीं

No Electricity Village सात दशक से बिजली नहीं
No Electricity Village सात दशक से बिजली नहीं
  • No Electricity Village जो गाँव दो जिलों या प्रदेश की सीमा पर आबाद होते हैं उनको हमेशा मुसीबत ही झेलनी पड़ती है। आधे काम जिले में तो आधे दूसरे राज्य में होते हैं। कभी-कभी तो सीमा विवाद में विकास ही उलझ जाता है। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की सीमा पर बसे सीधी जिले के ताल गांव की कहानी भी ऐसी ही है। यहां आजादी के बाद से ही आज तक बिजली नहीं है। लालटेन और मशाल की रोशनी में शादी-ब्याह होते हैं। छत्तीसगढ़ के नेटवर्क मिलने के कारण ग्रामीण सीएम हेल्पलाइन में शिकायत नहीं कर पाते। इसलिए पेड़ पर चढ़कर मध्यप्रदेश सर्किल का मोबाइल नेटवर्क पकड़ते हैं।
No Electricity Village सात दशक से बिजली नहीं
No Electricity Village सात दशक से बिजली नहीं
  • No Electricity Village विडम्बना ऐसी है कि मोबाइल चार्ज करने और गेहूं पिसवाने के लिए 6 किमी दूर छत्तीसगढ़ के गांव जाना पड़ता है। गांव में करीब 150 घर में 500 लोग रहते हैं। 98% आदिवासी परिवार हैं। ग्रामीण बताते हैं, वर्ष 2014 में विरोध के बीच गांव में सोलर प्लांट का काम शुरू हुआ था। 2015 में प्लांट चालू होने से गांव में पहली बार बिजली आई, लेकिन ये रोशनी ज्यादा दिन तक टिक न सकी। प्लांट में लगाई गई 18 नग सोलर प्लेट चोरी हो गईं। इसके बाद दोबारा गांव में बिजली नहीं आई।
No Electricity Village सात दशक से बिजली नहीं
No Electricity Village सात दशक से बिजली नहीं

No Electricity Village एक सीजन में होती है खेती

  • No Electricity Village ताल गांव में 200 आदिवासी परिवार हैं, जो खेती के लिए बारिश पर आश्रित हैं। बिजली न होने से सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, जबकि गांव की सीमा से ही मबई नदी निकलती है। यदि गांव में बिजली पहुंचे तो किसानों के दिन खेती से बहुर सकते हैं। बाहर से आए लोगों को देखते ही गांव के लोगों का दर्द छलक पड़ता है। वे कहते हैं, शादी-ब्याह का समय है। आसपास के गांवों में शादी के दिन बिजली की चकाचौंध रहती है। हमारे गांव में बेटियों की शादी चिमनी व मशाल की रोशनी से होती है। बच्चे पूछते कि गांव में बिजली कब आएगी तो जवाब तक नहीं दे पाते।

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