Ram Mandir Dhwajarohan उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राममंदिर ध्वजारोहण समारोह के धार्मिक अनुष्ठान शनिवार को विधि विधान के साथ आरती के साथ सम्पन्न हुआ। कल के अनुष्ठान में प्रमुख रूप से राममंदिर के शिखर पर जिस ध्वज का आरोहण करना है उसका पूजन हुआ। राममंदिर ध्वजारोहण समारोह के मुख्य यजमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य डॉ अनिल मिश्र ने सपत्नीक अनुष्ठान किया और ध्वज का पूजन अर्चन हुआ। राममंदिर ध्वजारोहण समारोह में आमंत्रित अन्य यजमान ने भी सपत्नीक ध्वज पूजन में प्रतिभाग किया।
गूंजेगी शंख व घंटा घड़ियाल की ध्वनि Ram Mandir Dhwajarohan

त्रेतायुग के 3 मुख्य प्रतीक
यह ध्वज रामायण काल के त्रेता युग में प्रयुक्त ध्वजों की अनुकृति से प्रेरित है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के ध्वज का रंग केसरिया होगा, जो धर्म, त्याग और साहस का प्रतीक है. ध्वज में तीन मुख्य प्रतीकों ॐ, सूर्य और कोविदार वृक्ष को अंकित किया गया है, जो इसकी सबसे बड़ी विशेषता मानी जा रही है. सूर्य भगवान राम के सूर्यवंशी वंश होने का प्रतीक है, जो शौर्य, तेज और पराक्रम की ऊर्जा दर्शाता है. वहीं ॐ सनातन संस्कृति के अध्यात्म, अनंतत्व और निरंतर गतिशीलता का प्रतीक है. वहीं त्रेता युग के कोविदार वृक्ष का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में, विशेष रूप से अयोध्या कांड में कई बार मिलता है.

विवाह पंचमी के मौके पर पीएम मोदी द्वारा अयोध्या के रामलला मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराया जाएगा. ध्वज को बनाने में चार से पांच कारीगर हर दिन काम कर रहे हैं और उसकी पवित्रता का खास ध्यान रखना चाहिए. साथ ही इस ध्वज में त्रेतायुग के तीन मुख्य प्रतीक भी लगे हुए हैं. आइए जानते राम मंदिर के शिखर पर लगने वाला ध्वज कैसा है… यह ध्वज ना केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि भारतीय अध्यात्म, इतिहास और पर्यावरणीय संदेशों की गहराई भी समेटे हुए है. इस ध्वज में त्रेतायुग के तीन मुख्य प्रतीक भी लगे हुए हैं. यह ध्वज अहमदाबाद की एक कंपनी में तैयार किया जा रहा है. ध्वज को विशेष पैराशूट फैब्रिक और रेशमी धागों से बनाया गया है

