Savin Bansal डीएम बने फरिश्ता – निभाया इंसानियत का रिश्ता

आशीष तिवारी की रिपोर्ट –
Savin Bansal कहते हैं फरिश्ते आसमानों में नहीं इसी धरती पर हमारे समाज में हमारे इर्द-गिर्द रहते हैं बस जरूर उनको पहचानने की है। कुछ इसी भरोसे के साथ जब एक लाचार महिला अपने बच्चों को लेकर एक संवेदनशील आईएएस अफसर से मिली तो उसकी और उसके बच्चों की किस्मत संवर गई। जी हां हम बात कर रहे हैं स्मार्ट देहरादून के उस आईएएस अधिकारी की जिसने अपनी कुर्सी के साथ न्याय करने के साथ-साथ समाज में अपने शानदार फैसलों से न सिर्फ लोगों का दिल जीता बल्कि अब वह हर मायूस के लिये उम्मीद भी बन गए हैं। उत्तराखंड सरकार के बेहद प्रभावशाली ब्यूरोक्रेट्स में शामिल जिलाधिकारी सविन बंसल के फैसले ने एक बार फिर डूबती उम्मीद और अंधेरे में भटकती जिंदगियों को एक नई रोशनी, एक नई उम्मीद दी है। आईये आपको बताते हैं कैसे डीएम देहरादून सविन बंसल बच्चों के लिए एक बार फिर मसीहा बने और पूरे परिवार को मायूसी के अंधेरे से बाहर निकाल दिया

एक बार फिर जनता दरबार ने लाचार परिवार को दी नई उम्मीद Savin Bansal

Savin Bansal
पति की आकस्मिक मृत्यु के बाद जीवन की कठिन परिस्थितियों, आर्थिक तंगी, तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी तथा सिर पर ऋण के बोझ से जूझ रही विधवा शांति राणा को जिला प्रशासन  मानवीय संवेदनाओं के साथ सहारा  बना है। जिला प्रशासन ने सीएसआर फंड के माध्यम से शांति राणा को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान  की जिससे उनका बैंक ऋण पूर्ण रूप से निपट गया है। इसके साथ ही शांति राणा की पुत्री अंशिका की कक्षा 12वीं तक की शिक्षा सुनिश्चित करते हुए 1.62 लाख रुपये की फीस एकमुश्त सीधे संबंधित स्कूल प्रबंधन के खाते में जमा कराई गई है, जिससे व्यथित मॉ और उनके बच्चों को भारमुक्त कर दिया है।  मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने विधवा शांति राणा की 8वीं में पढ रही बेटी अंशिका की कक्षा 12 तक 1.62 लाख फीस स्कूल प्रबन्धन के खाते में एकमुश्त जमा करा दी है।
बच्चों को अब मिलेगी मुफ्त शिक्षा और मां को मिलेगा रोजगार
आपको बता दें कि जिलाधिकारी सविन बंसल के नवम्बर  में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान शांति राणा ने अपनी पीड़ा साझा की थी। उन्होंने बताया कि उनके पति मनबहादुर ने परिवार की आजीविका के लिए ई-रिक्शा के लिये 3,72,600 रुपये का बैंक ऋण लिया था। दुर्भाग्यवश एक सड़क दुर्घटना में उनके पति की मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं रहा। वर्तमान में शांति राणा की 12 वर्षीय पुत्री अंशिका, 5 वर्षीय पुत्र अक्षय एवं एक अन्य किशोर पुत्र है, जिनके भरण-पोषण और सीमित संसाधनों के चलते वह ऋण की किश्तें जमा करने में असमर्थ थीं।
सीएसआर फंड से डीएम ने परिवार को कर्ज मुक्त किया
शांति राणा ने जिलाधिकारी के सामने अपनी अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति बताई और ऋण राहत तथा आर्थिक सहायता का अनुरोध किया गया था। मामले की गंभीरता एवं मानवीय पक्ष को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने उप जिलाधिकारी (न्याय) को प्रकरण की जांच कर नियमानुसार त्वरित राहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।इसस पूर्व जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने सीएसआर फंड से 4 लाख रुपये की सहायता राशि शांति राणा के बैंक खाते में भेजी , जिससे उनका बैंक ऋण समाप्त हो गया। साथ ही उनकी पुत्री अंशिका की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए कक्षा 12वीं तक की फीस एकमुश्त स्कूल प्रबंधन के खाते में जमा कराई गई है। इसके अतिरिक्त शांति राणा को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है।
मुख्यमंत्री के जन सेवा के अभियान को धरातल पर उतार रहे हैं डीएम बंसल
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि पीड़िता को विभिन्न शासकीय योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा लाभ एवं अन्य संभावित सहायता से आच्छादित किया जाए, ताकि परिवार को तात्कालिक राहत के साथ-साथ भविष्य में स्थायी आजीविका के साधन भी उपलब्ध हो सकें।जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे संवेदनशील एवं मानवीय मामलों में पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी और उन्हें संकट की घड़ी में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। शाइनिंग उत्तराखंड न्यूज़ भी आपसे अपील करता है कि अगर जिला प्रशासन की आपको किसी भी रूप में मदद चाहिए तो जनता दरबार में अपनी फरियाद एक बार डीएम सविन बंसल के सामने जरूर रखिए