Sureshwari Devi Mandir मंत्री के बेटे की शादी पर बवाल – अनोखा है मंदिर का इतिहास

Sureshwari Devi Mandir  बात सिर्फ शादी की नहीं एक पिता की आस्था और परिवार की भक्तिभाव से किये गए वादे को निभाने की थी लेकिन ऐसा बवाल उठा कि शादी के रंग में कुछ कसैला भांग पड़ गया और विवादों में आ गए उत्तराखंड के मंत्री खजानदास …. लेकिन मीडिया पर दोष मँढते हुए उनके बेटे की भावुक पोस्ट ने उनका पक्ष भी कुछ हद तक साफ़ किया है लेकिन जिस रहस्यमई मंदिर में शादी खटाई में पड़ गयी उसका इतिहास शायद ही आपको पता हो , तो आइये जानते हैं मंदिर की कहानी……

 

सिद्धपीठ मां सुरेश्वरी देवी मंदिर की कहानी Sureshwari Devi Mandir


हरिद्वार के राजाजी टाइगर रिजर्व स्थित प्राचीन सिद्धपीठ मां सुरेश्वरी देवी मंदिर में कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से पंडाल लगाने पर पार्क प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कर टेंट हटवा दिया. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां देवराज इंद्र ने स्वर्ग प्राप्ति के लिए तपस्या की थी.


उत्तराखंड के हरिद्वार में रानीपुर के घने जंगलों के बीच, सूरकूट पर्वत पर एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर स्थित है जिसका रहस्य देवताओं के काल से जुड़ा है. राजाजी टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित दायरे में बसा मां सुरेश्वरी देवी मंदिर अपनी अपार आध्यात्मिक शक्ति के लिए जाना जाता है. इसकी गिनती सिद्धपीठों में भी होती है. यह मंदिर देवी दुर्गा और देवी भगवती को समर्पित है. लेकिन बीते दो दिनों से यह पवित्र धाम अपनी शांति के बजाय एक हाई-प्रोफाइल शादी और उससे उपजे कानूनी विवाद को लेकर सुर्खियों में है.


जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे अनुज की शादी के लिए जब शनिवार को ट्रकों में भरकर टेंट और लग्जरी कुर्सियां इस आरक्षित वन क्षेत्र (Reserved Forest) में पहुंचने लगीं, तो पर्यावरण प्रेमियों के कान खड़े हो गए. यह वही इलाका है जहां हाथियों की चिंघाड़ और गुलदारों की आहट सामान्य बात है. वन नियमों के अनुसार, इस साइलेंस जोन में किसी भी प्रकार के शोर-शराबे या बड़े पंडाल की सख्त मनाही है.

इतिहास स्कंदपुराण के केदारखण्ड में दर्ज है

जिस मंदिर को लेकर आज इतना हंगामा है, उसका इतिहास स्कंदपुराण के केदारखण्ड में दर्ज है. मंदिर के पुजारी त्रिलोचन तिवारी और मंदिर समिति के आशीष मारवाड़ी बताते हैं कि यह कोई साधारण स्थान नहीं है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवराज इंद्र को स्वर्ग लोक से निष्कासित कर दिया गया और वे राजा रजी के पुत्रों के भय से क्षीर सागर में छिप गए, तब भगवान विष्णु ने उन्हें इसी सूरकूट पर्वत पर जाकर तपस्या करने की सलाह दी थी.

इंद्र ने यहां एक साधारण मानव की भांति कठोर साधना की. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उन्हें दर्शन दिए और विजय का आशीर्वाद दिया. चूंकि इंद्र का एक नाम सुरेश है, इसलिए देवताओं की इस ईष्ट देवी का नाम सुरेश्वरी पड़ा. मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से चर्म रोग और कुष्ठ रोग दूर हो जाते हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है.


भावुक थी शादी के लोकेशन की वजह

विवादों के बाद मंत्री खजान दास ने कहा कि उनके बेटे की सेहत माँ सुरेश्वरी के आशीर्वाद से ही ठीक हुई थी, इसलिए वे यहां केवल श्रद्धावश शादी करना चाहते थे. उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें नियमों की जानकारी नहीं दी गई थी. अंततः, रविवार दोपहर को भारी हंगामे और वन विभाग की सख्ती के बीच, भव्य शादी का कार्यक्रम बेहद सीमित कर दिया गया. मंत्री के बेटे ने जंगल की शांति के बीच सादगी से मां के दरबार में केवल 7 फेरे लिए और पूजा-अर्चना की. इस विवाद के बाद लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आयी हैं एक और लोग इसको आस्था से जोड़ रहे हैं तो कुछ लोग इसमें सियासत देख रहे हैं।