Special Report By : Anita Tiwari , Dehradun

Violence Flourishing in Schools अक्सर आप स्कूलों में बच्चों के आपसी झगडे की खबर पढ़ते होंगे या उसको अपने इर्द गिर्द देखते होंगे। टीवी अखबार में कभी कभी बड़ी घटनएं भी सामने आती है जिसमें स्कूल कॉलेज के बच्चे मामूली बात पर खतरनाक हिंसा कर बैठते हैं और मुसीबत अभिभावक को झेलनी पड़ती है। दरअसल बच्चों का जीवन अब बच्चों का खेल नहीं रहा है। मॉर्डन और डिजिटल युग में स्कूलों में भी अब ग्रुप्स , टीम और कहीं कहीं गुंडा गैंग सक्रिय हो गई हैं। सोशल मीडिया पर समय से पहले और ज़रूरत से ज्यादा बच्चों की मौजूदगी से हालत और बिगड़ रहे हैं।
Violence Flourishing in Schools जानिए कैसे अपने बच्चों को बचा सकते हैं

- Violence Flourishing in Schools शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक के बीच दूरी बढ़ने पर ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं। दिल्ली हो या राजस्थान , यूपी हो या बिहार सरकारी से ज्यादा निजी स्कूलों में स्कूली गुंडा गैंग की खबरें अब सामने आने लगी है। अकेले राजस्थान की बात करें तो यहां भी ऐसे ग्रुप सक्रिय हैं, जो छोटे-छोटे मासूमों सहित किशोर छात्र-छात्राओं को जाल में फंसाकर रकम ऐंठ रही हैं। इनमें नामी स्कूल भी शामिल हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि ऐसी गैंग में अभी तक अधिकांश सदस्य नाबालिग ही हैं। इनका संचालन बाहरी तत्वों के माध्यम से भी होने की आशंका है। यहां तक कि , ऑनलाइन शिक्षा के दौरान भी इनके कारनामे लगातार सोशल मीडिया के जरिए जारी रहे। इसकी भनक तक स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को नहीं लगी। ऐसे कारनामों में छात्रों के साथ छात्राएं भी शामिल हैं।

Violence Flourishing in Schools अलर्ट रहें: मिले हैं खतरनाक संकेत
- स्कूल प्रबंधन बच्चों के ऐसे मामलों को हल्के में ले रहे हैं। लंबे समय से जानकारी होने के बावजूद सरगनाओं को सिर्फ स्कूल से निकालने की कार्रवाई कर मामलों को खत्म किया जा रहा है। प्रबंधन के मूकदर्शक बने रहने का नतीजा यह हो रहा है कि यहां से बच्चे अपराध के दलदल में फंस रहे हैं।Violence Flourishing in Schools स्कूल गैंग कैसे सक्रिय है, इसको चलिए कुछ उदाहरणों से समझते हैं कि कैसे ये गिरोह बच्चों को शिकार बनाते हैं और चंगुल में फंसाते हैं…

- Violence केस 1 – खौफ इतना कि बेटी रहने लगी बीमार : झालाना निवासी एक सरकारी अधिकारी ने अपनी पुत्री का एडमिशन कुछ साल पहले शहर के एक नामी स्कूल में करवाया। उस स्कूल में कुछ बच्चों की अलग ही गैंग थी। अभिभावकों ने बताया कि गैंग के बच्चे उनकी पुत्री को लगातार परेशान करते रहे और उसके साथ मारपीट तक की गई। बेटी इससे इतनी खौफजदा हो गई कि बीमार रहने लगी और स्कूल जाने से डरने लगी। स्कूल में शिकायत की, लेकिन स्कूल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।

Violence केस 2 – रुपए चुराने के लिए किया ब्लैकमेल : जयपुर के एक नामी स्कूल में मामला सामने आया है। जिसमें 7वीं से 12वीं तक के छात्र—छात्राएं जाल में फंसे नजर आए। गिरोह का सरगना भी इनमें से ही है, जिसने दूसरे बच्चों को ब्लैकमेल कर रुपए चुराने के लिए कहा। बच्चों ने रुपए चुराकर रकम की व्यवस्था की तो सरगना व उसके साथियों ने उससे बंदूक खरीद गुंडागर्दी का दायरा बढ़ाने के लिए कहा। बच्चे को सिखाया गया कि यही रास्ता राजनीति में जाने और पैसे कमाने का भी है।

- Violence केस 3 – ड्रग्स का सेवन : जयपुर के नामी गिरामी स्कूलों का ड्रग सेवन का बढ़ता चलन भी देखा जा रहा है। बच्चों को शुरू में ड्रग की लत लगाई जाती है और फिर उनसे घर से पैसे चुराकर ड्रग खरीदने और दूसरों को खिलाने को भी कहा जाता है। ये अफसोसनाक घटनाएं किसी एक राज्य या शहर की नहीं हैं। आज देश के बड़े बड़े नामी बॉर्डिंग्स और प्राइवेट स्कूलों में आये दिन झगडे और बाल अपराध की घटनाये बढ़ती जा रही है। ये सभ्य समाज के लिए बेहद गंभीर अलर्ट है। युवा भारत में आने वाला वक़्त यूथ का है लिहाज़ा ड्रग्स , हिंसा , झगडे और साइबर क्राइम से हमारे मासूम बच्चों को बचाने के लिए उनपर निगरानी के साथ साथ सही गाइडेंस भी देने की सख्त ज़रूरत है।
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