Special story by Anita Tiwari , Dehradun
Champawat dhami 22 लेकिन यह राजनीति है और लोकतंत्र में जब तक अंतिम वोट की गिनती ना हो जाए संभावनाएं कुछ भी हो सकती हैं …. नतीजे किसी के भी पक्ष में जा सकते हैं … ऐसे में हर चुनाव को एक बेहतर रणनीति के साथ लड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से आश्वस्त है कि धामी चंपावत जीत कर विधानसभा में बड़े आराम से अपनी जगह बना लेंगे… लेकिन 0.05 परसेंट क्या होगा भाजपा का प्लान B , इस पर भी बात करनी जरूरी है।

Champawat dhami 22 क्या है भाजपा का प्लान B
- Champawat dhami 22 क्योंकि यह वही धाकड़ पुष्कर सिंह धामी है जिन्होंने अपनी पूरी राजनीति खटीमा में शुरू की और वही से जीतकर मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे थे । लेकिन भला किसने सोचा था कि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के एक सामान्य से युवा उम्मीदवार के हाथों उन्हें हार मिलेगी ? भला भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों ने यह कहां सोचा होगा उनके मुख्यमंत्री और भविष्य के मुख्यमंत्री उम्मीदवार धामी को भुवन कापड़ी जैसे कम अनुभवी और लो प्रोफाइल नेता सीएम को हराकर पार्टी और प्रदेश को चौंका देंगे ? अब ऐसे में सब जानते हैं कि नतीजा लगभग तो तय माना जा रहा है। लेकिन लगभग और सुनिश्चित नतीजे के बीच में एक बारीक की संभावना और आशंका भी जरूर होगी, और यही बारीक संभावना और उम्मीद कांग्रेस को सक्रिय और मुख्यमंत्री धामी को सतर्क बनाती है

- Champawat dhami 22 तभी तो चंपावत उप चुनाव की घोषणा होते ही मुख्यमंत्री का पूरा फोकस चंपावत के विकास पर फिक्स हो गया । कोर कमेटी की बैठक के बाद तय हुआ कि एक बड़ा रोड शो निकाल कर स्थानीय लोगों को अपनी सरकार की योजनाएं बताई जाएं और इस दौरान पीएम मोदी की तर्ज़ पर जब सीएम धामी ने कहा कि उन्हें चंपावत के देवी देवताओं ने बुलाया है और कहा कि चंपावत का विकास उनके टॉप एजेंडे में शामिल है। इसी के बाद कृषि मंत्री गणेश जोशी ने घोषणा करते हुए किसानों से जुड़े बड़े आयोजन की घोषणा भी चंपावत के लिए कर दी

- Champawat dhami 22 फिर हुआ प्रशासनिक फेरबदल , जिनमें सरकार ने चंपावत के किले को मजबूत बनाने और जीत सुनिश्चित करने के लिए तबादले किये। लेकिन यह सब करना क्यों पड़ रहा है ? दरअसल इसके पीछे एक ऐसा भय है जो खटीमा से चंपावत तक भाजपा के मन में कहीं ना कहीं छुपा हुआ है ….. यही वो पॉइंट है जहां कांग्रेस के उम्मीदवार को हौसला देगा तो वही खुद भाजपा के अंदर धानी विरोधी गुट को उम्मीद नजर के रूप में नजर आ रही है। क्योंकि 5 साल अगर धामी सरकार चल गई तो बहुत से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की राजनीति पर सवाल खड़े हो जाएंगे और उनका भविष्य भी डावांडोल हो जाएगा। क्योंकि मुख्यमंत्री धामी अभी युवा हैं प्रधानमंत्री मोदी की भी उन पर विशेष कृपा है। ऐसे में अगर धामी सरकार 2027 तक रहती है तो फिर उसके बाद उनका भविष्य और भी लंबा हो सकता है ।

- Champawat dhami 22 यह बात केंद्र में आलाकमान और प्रदेश की भाजपा संगठन के नेता भी अच्छी तरीके से समझते हैं की पार्टी के अंदर भी कुछ लोग ऐसे हैं जिनके मन में महत्वाकांक्षा और नजर सीएम की कुर्सी पर बनी हुई है। लेकिन अनुशासन और पार्टी के सख्त फैसलों के भय से उन्होंने चुप्पी साध रखी है , और तलाश में है कि उन्हें बस एक मौका मिल जाए जो मौका चंपावत के उपचुनाव में बेहद हल्का ही सही लेकिन उन्हें नजर जरूर आ रहा है। भितरघातियों से परेशान भाजपा पहले ही एक्स-रे करने का मूड बना चुकी है। ऐसे में मुख्यमंत्री अगर अप्रत्याशित रूप से कहीं हार जाते हैं तो विकट स्थिति बन सकती है।

- Champawat dhami 22 ऐसे में मैनेजमेंट के तौर पर हर चुनाव को प्लान करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने जरूर कोई प्लान भी भी तैयार कर लिया होगा। जिसमें धामी नहीं तो सिटिंग विधायकों में से किसी को मुख्यमंत्री बनाने का हिडेन प्लान भी एजेंडे में शामिल होगा। फिर सवाल उठता है कि सीएम धामी नहीं तो हार के बाद
Champawat dhami 22 कौन हो सकता है भाजपा में मुख्यमंत्री का दावेदार ?


