Story By – Anita Tiwari , Uttarakhand

Dr Dilip Mahalanabis डॉ. दिलीप महालनोबिस को बांग्लादेश युद्ध के दौरान लाइफ सेविंग सॉल्यूशन को विकसित करने और ओरल रीहाइड्रेशन थेरपी (ओआरटी) को प्रचलित करने का श्रेय दिया जाता है। वह लंबे वक्त से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे।
Dr Dilip Mahalanabis को हमारी सादर श्रद्धांजलि

- Dr Dilip Mahalanabis ओआरएस के जनक और मशहूर बाल चिकित्सक डॉ. दिलीप महालनोबिस का 88 साल की उम्र में निधन हो गया। वह स्वास्थ्य कारणों के चलते काफी दिनों से कोलकाता के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थे। डॉ. दिलीप महालनोबिस को बांग्लादेश युद्ध के दौरान लाइफ सेविंग सॉल्यूशन को विकसित करने और ओरल रीहाइड्रेशन थेरपी (ओआरटी) को प्रचलित करने का श्रेय दिया जाता है।

Dr Dilip Mahalanabis मृत्युदर कम करने में कारगर ORS
- टीम ने ओआरएस बनाया जिसकी प्रभावशीलता 1971 के युद्ध तक केवल नियंत्रित परिस्थितियों में ही आजमाई गई थी। आईसीएमआर-एनआईसीईडी के डायरेक्टर शांता दत्त ने बताया, ‘ओआरएस एक महान खोज थी और इसके लिए डॉ. महालनोबिस का योगदान अभूतपूर्व है। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान कोलेरा (हैजा) से संक्रमित मरीजों की मृत्युदर कम करने में कारगार साबित होने के बाद ओआरएस को वैश्विक रूप से स्वीकार्यता मिली।’

युद्ध के चलते करीब 1 करोड़ लोग जान बचाकर बंगाल के बॉर्डर जिलों में भाग आए थे। उस वक्त बोनगांव स्थित रिफ्यूजी कैंप में हैजा महामारी फैल गई थी और अंत: स्रावी द्रव का स्टॉक भी खत्म हो गया था। इसके बाद डॉ. महालनोबिस ने कैंप में ओआरएस भिजवाए। ओआरएस के चलते रिफ्यूजी कैंप में मरीजों की मृत्युदर 30 फीसदी से घटकर 3 फीसदी तक हो गई।
Dr Dilip Mahalanabis 20 वीं शताब्दी की महान खोज
Dr Dilip Mahalanabis ओआरएस को मेडिसिन में 20वीं शताब्दी की महान खोज करार दिया गया। डॉ. महालनोबिस को 2002 में यूनिवर्सिटी ऑफ कोलंबिया ऐंड कॉरनेल में पोलिन पुरस्कार और 2006 में थाईलैंड सरकार ने उन्हें प्रिंस महिडोल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। डॉ. महालनोबिस ने कोलकाता स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ को अपनी एक करोड़ की सेविंग दान की थी। यहीं से उन्होंने बाल चिकित्सक के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी।
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