Dr T K Lahiri : मिलिए जीते जागते भगवान से -1 Motivational Hero

Special Story By : Anita Tiwari , Dehradun 

Dr T K Lahiri डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है, उन्हें ये उपनाम ऐसे ही नहीं दिया गया है। कोरोना काल में ये हम सबने देखा कि डॉक्टर्स ने कैसे अपनी जान की परवाह किए बिना लगातार काम में लगे हैं। इस डॉक्टर्स डे पर हम आपको एक ऐसे डॉक्टर की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्हें लोग महापुरुष और भगवान कहते हैं। जो आज भी 81 साल की उम्र में मुफ्त में रोगियों का इलाज कर रहे हैं। आइए जानें वाराणसी के डॉ टी के लहरी के बारे में…?

 

Dr T K Lahiri कौन हैं डॉ. टी के लहरी ?

Dr T K Lahiri
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  • Dr T K Lahiri प्रोफेसर डॉ. टी के लहरी का पूरा नाम तपन कुमार लहरी है। डॉ. टी के लहरी देश के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वर्तमान में 81 साल की उम्र में प्रोफेसर डॉ. टी के लहरी मरीजों को मुफ्त में इलाज करते हैं। डॉ. टी के लहरी को भारत सरकार ने पद्मश्री से भी सम्मानित किया है। लोग इनकी तुलना ना डा. विधानचंद्र राय से करते हैं, जिनकी जयंती पर नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।
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  • Dr T K Lahiri अमेरिका से की है डॉक्टर लहरी ने पढ़ाई पद्मश्री डॉ. लहरी का जन्म पश्चिम बंगाल कोलकाता में हुआ है। उन्होंने अमेरिका से डॉक्टरी की पढ़ाई की है। 1974 में डॉ. लहरी में बीएचयू में लेक्चरर के पद पर सेवा देते थे। मरीजों की सेवा करने के लिए उन्होंने शादी नहीं की। डॉ. लहरी का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें अमेरिका के कई बड़े अस्पताल से ऑफर आया था लेकिन उनका मन यहीं लगा हुआ है।
Dr T K Lahiri
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  • Dr T K Lahiri 1997 के बाद कभी नहीं ली डॉक्टर लहरी ने सैलरी , जी हाँ  मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. लहरी ने 1997 के बाद से सैलरी लेनी बंद कर दी थी। वह अपनी पूरी सैलरी जरूरतमंद मरीजों को दान देते थे। बताया जाता है कि 1997 में उनकी सैलरी 84,000 रुपये थी और अन्य भत्तों को मिलाकर ये एक लाख के ऊपर थी।
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  • Dr T K Lahiri 81 साल की उम्र मरीजों का करते हैं फ्री में इलाज वाराणसी के प्रतिष्ठित सर सुंदरलाल अस्पताल से डॉ टी के लहरी सेवानिवृत्त हुए हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल में काफी लंबे समय तक काम कर टी के लहरी रिटायर होने के बाद भी 81 साल की उम्र में भी मरीजों का मुफ्त इलाज करते हैं। उनके इसी काम को देखते हुए साल 2016 में चिकित्सा के क्षेत्र में उनके द्वारा किये गए योगदान को सराहने के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा था।
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