Politics of Uttarakhand एक साल होने वाले हैं जब खटीमा हार कर प्रदेश के सीएम बने थे पुष्कर सिंह धामी। ये एक चौंकाने वाला फैसला बताया गया लेकिन हर दिन अपने फैसलों और तेवर से चौकाने का काम किया चम्पावत जीतकर विधायक बने मुख्यमंत्री धामी ने … लेकिन सबसे बड़ी घटना जिसने सबको एक बार फिर चौंकाया वो है सीएम के राजनैतिक गुरु भगत दा का समुद्र से पहाड़ की ओर वापस लौटना … जिसके बाद तरह तरह की कानफूसी भी अलग कहानी बुन रही है… अंदरखाने चर्चा है कि अगले कुछ दिनों में पूर्व महामहिम के अनुभवी सुझाव और सलाह का असर सरकार में भी दिखने लगेगा।
Politics of Uttarakhand जल्द खत्म होगा इंतज़ार

- Politics of Uttarakhand अब पहले बात उन वेटिंग मोड में जुगत भिड़ा रहे नेताओं की कर लें जो लम्बे समय से मिशन परिक्रमा में जुटे हैं लेकिन हाँथ कुछ लग नहीं रहा है। कई विधायक मंत्री बनाये जाने की उम्मीद लगाए हैं , मौजूदा मंत्री भी नज़र टिकाये हुए हैं ऐसे में सरकार के दिल्ली दौरे पर जाते ही कयास , अफवाह और संभावनाओं की खबर चलने लगती है कि लिस्ट फ़ाइनल होने वाली है लेकिन नतीज़ा नाउम्मीदी मिलती है। डिफेंस कॉलोनी के पावर हॉउस में अचानक भाजपा नेताओं का दौरा बढ़ने लगा है। ये क्यों हो रहा है सब जानते और समझते हैं

- Politics of Uttarakhand फिर मुद्दा है सरकार और शासन का जहाँ गाहे बगाहे खबर मंत्रियों की विभागीय अफसरों से तनातनी मनमुटाव और नाफरमानी की खटास बाहर आ ही जाती है जिसकी तस्दीक वरिष्ठ मंत्री महाराज सहित कई मंत्री पानी सर से ऊपर जाते ही कर देते हैं। ऐसे में अगर सरकार में बेहतर तालमेल बनाना और जनहित की योजनाओं को धरातल पर ले जाना है तो ब्यूरोक्रेसी को नरम गरम तेवर दिखाने होंगे और कैबिनेट के साथियों को भरोसा भी देना होगा कि उनका इशारा सरकार समझ रही है। ऐसे में पूर्व महामहिम की अनुभवी सलाह और राजनीतिक कौशल का फायदा पहले से ज्यादा और तेज़ी से सरकार को मिलेगा

- Politics of Uttarakhand इधर तेज़ी तो प्रदेश भाजपा मुख्यालय में भी दिखा रही है जहाँ उम्मीदवार और दावेदारों की हलचल भी है और अध्यक्ष की टीम नेताओं को उनके प्रभाव के पैमाने पर लिस्ट से इन और आउट किया जा रहा है। लेकिन अंदरखाने सुगबुगाहट ये भी है की अब एक नया जोश है क्योंकि भगत दा के करीबियों और गुरु शिष्य के कॉमन गुडलिस्ट के नेताओं को उम्मीद बढ़ने लगी है। बस देखना ये है कि किस कद के नेता को कौन सा दायित्व दिया जाना है, सूत्र बताते हैं कि जल्द ही बाहर आने वाली लिस्ट पर मुख्यमंत्री धामी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के साथ साथ पूर्व सीएम कोश्यारी का प्रभाव दिखाई देगा ।

- Politics of Uttarakhand होली के पहले माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री दायित्व बांटने का एलान कर इंतज़ार खत्म कर देंगे। आपको बता दें कि इस वक़्त उत्तराखंड सरकार के विभिन्न बोर्डों, निगमों और समितियों में अभी 88 खाली पदों का खाली ब्योरा सरकार की मेज़ तक पहुँच चुका है। इनमें सदस्यों की संख्या को जोड़कर खाली पदों की संख्या 100 से अधिक है। अब पूर्व गवर्नर कोश्यारी की फुल टाइम उपलब्धता और प्रदेश में मौजूदगी से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ये बड़ी टेंशन आसानी से दूर हो सकती है और होली से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को दायित्व की सौगात दे सकते हैं।

