Special Story By : Anita Ashish Tiwari , Dehradun
Yogi Dhami 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की तो सीएम द्वय योगी और धामी ने अपनी साख प्रदेशों और पार्टी संगठन में और मजबूत कर लिया है।

Yogi Dhami संयोग या प्रयोग है ये समानताएं
- क्योंकि जिस तरह की ये जीत सामने आई उसका राजनैतिक मायने भी यही है कि योगी Yogi Dhami और धामी की काबिलियत के सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी का हस्ताक्षर हो जाना। जिस तरह से यूपी और उत्तराखंड में भाजपा को विपक्षी पार्टियों से कड़ी टक्कर मिलती दिखाई जा रही थी , उन सभी कयासों को योगी और धामी ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ और कुशल रणनीति से ध्वस्त कर दिया।

- अब बात Yogi Dhami के शासन की समानता पर करते हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सरकार बने एक पखवाड़े से ज्यादा का समय गुजर चुका है। इन 15 दिनों की राजकाज का विश्लेषण करें तो कई चीजें ऐसी है जो पहले कभी न थी। प्रशासनिक व्यवस्था में लगाम लगाना हो , जनता के बीच साख बनाना हो या फिर अपने मंत्रिमंडल में विधायकों को शामिल करना हो , सीएम योगी और सीएम धामी दोनों ने इस मामले में बहुत धैर्य और गुणा गणित के बाद ही फैसले लिए ।

कहानी Yogi Dhami दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास में नरेंद्र मोदी ने लिखी
- Yogi Dham उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली को बड़ी समझदारी के साथ पुष्कर सिंह धामी फॉलो करने लगे हैं। जिसका इशारा बीते दिनों तब मिला जब सचिवालय में बैठक के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी ने साफ कर दिया कि जनहित के मुद्दों पर अफसरों को वो चैन से सोने देंगे और ना खुद सोएंगे । इसके साथ-साथ उन्होंने लेटलतीफी और काम चोरी करने वाले अधिकारियों को सख्त इशारा दे दिया कि उन्हें अब रिजल्ट ओरिएंटेड बनना पड़ेगा यानी समय पर दफ्तर आना , समय पर फाइलों को निपटाना और समय पर योजनाओं का धरातल पर उतर जाना जरूरी होगा ।

- Yogi Dham लेकिन यहां ये खास तौर पर ध्यान देने वाला सच है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में ज़मीन आसमान का अंतर है। बीते दिनों स्वास्थ्य सचिव पंकज पांडे का मामला इसकी ताज़ा नज़ीर है । आये दिन विधायक , मंत्री नौकरशाही पर सवाल उठाते रहे हैं और अब तो हैवीवेट कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने अफसरों के सीआर लिखने का ही अधिकार मांग लिया है। लेकिन उत्तर प्रदेश इस मामले में थोड़ा इससे जुदा है, क्योंकि वहां सचिवालय में हनक और हथौड़ा मुख्यमंत्री योगी का ही गरजता है।
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Yogi Dhami संयोग या प्रयोग है ये समानताएं - उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कड़े तेवर दिखाते हुए आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नट बोल्ट टाइट किए थे। Yogi Dham योगी राज पार्ट 2 में योगी आदित्यनाथ शुरुआती दौर में ही अधिकारियों, पुलिस और ब्यूरोक्रेसी के बीच सख्त संदेश दे रहे है कि जो अधिकारी कामचोरी करेगा या जनता के साथ अन्याय करेगा उसे या तो सस्पेंड कर दिया जाएगा या बिना किसी दबाव के तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर कर दिया जाएगा ।

- दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी हाईकमान ने इन दोनों मुख्यमंत्रियों को यह बात अच्छी तरीके से समझा दी है कि इस बार लड़ाई मुश्किल थी, लेकिन भाजपा ने विजय हासिल कर ली है। Yogi Dham लेकिन असल लड़ाई अब 2024 के आम चुनाव हैं जिसके लिए अब भारतीय जनता पार्टी किसी भी मोर्चे पर विपक्षी पार्टियों को कोई मौका नहीं देना चाहती है । ऐसे में भाजपा की कोशिश रहेगी कि जहां जहां उनकी सरकारें हैं वहां पारदर्शिता हो और जनता के बीच लोकप्रिय सरकार की इमेज को मजबूत कर योजनाओं को आगे बढ़ाना भाजपा मुख्यमंत्रियों की टॉप प्रियोरिटीज में होनी चाहिए।

- बीते दिनों पहले कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद विधानसभा में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए हाई पॉवर कमेटी बनाने के एलान से अपने दूसरे कार्यकाल के आगाज़ किया। Yogi Dham भूमाफियाओं और आपराधिक छवि के व्यक्तियों पर अब धामी सरकार में भी वो बुलडोज़र चलने को तैयार है। यानि भाजपा ने ब्रांड बुलडोज़र को भी एक मॉडल के तौर पर जनता के बीच वैसे ही पेश कर दिया है जैसे मोदी युग के शुरुआती दौर में गुजरात मॉडल को आगे रखा गया था।

- तो क्या ये समझ लिया जाए कि उत्तर प्रदेश में जो योगी सरकार में घटेगा उसका असर उत्तराखंड की धामी सरकार में भी दिखेगा ? Yogi Dham तो क्या ये माना जाए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फार्मूला योगी और धामी को सरकार चलाने के लिए दिया है उसी पर ही दोनों राज्यों की सरकार हूबहू आगे बढ़ेगी ?
पढ़िए खबर – धामी और हरक में हो सकती उपचुनाव की टक्कर https://shininguttarakhandnews.com/by-election-dhami/

